नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के चुनावी दंगल में तृणमूल कांग्रेस ने अपने योद्धाओं के नामों का ऐलान कर सबको चौंका दिया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य की अधिकांश सीटों पर प्रत्याशियों की सूची जारी करते हुए सामाजिक संतुलन पर विशेष जोर दिया है. यह चुनाव बंगाल की अस्मिता और भविष्य की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है. ममता ने न केवल विरोधियों को ललकारा है, बल्कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न चिह्न खड़े कर दिए हैं, जिससे राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है.
इस चुनाव का सबसे रोमांचक केंद्र भवानीपुर सीट बनने जा रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से ही चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है. यहां उनका सीधा मुकाबला उनके पूर्व सिपहसालार और अब भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी से होने की संभावना है. राजनीतिक गलियारों में इस सीट को बंगाल की सत्ता का प्रवेश द्वार माना जा रहा है. ममता ने स्पष्ट कर दिया है कि वे राज्य की सुरक्षा और सम्मान के लिए इस बड़ी परीक्षा को पार करने को तैयार हैं.
West Bengal | TMC announces names of candidates for 291 assembly seats
Voting for all 294 assembly seats in West Bengal will be held in two phases – on April 23 and 29 – with 152 and 142 seats going to polls, respectively. Counting of votes will take place on May 4. pic.twitter.com/235IbTGpwO— ANI (@ANI) March 17, 2026Also Read
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टीएमसी ने उम्मीदवारों के चयन में समाज के हर वर्ग को साथ लेने की कोशिश की है. पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी के अनुसार, इस सूची में महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अल्पसंख्यकों को विशेष स्थान मिला है. 291 प्रत्याशियों में 52 महिलाएं शामिल की गई हैं. साथ ही, 95 सीटों पर दलित और आदिवासी उम्मीदवारों को मौका दिया गया है. इसके अतिरिक्त, 47 मुस्लिम चेहरों को शामिल कर पार्टी ने अपने पुराने आधार को मजबूत बनाए रखने की सोची-समझी रणनीति अपनाई है.
तृणमूल कांग्रेस ने तीन सीटें अपने सहयोगियों के लिए खाली रखी हैं. दार्जिलिंग के पहाड़ी इलाकों में अनित थापा के नेतृत्व वाली बीजीपीएम चुनाव मैदान में उतरेगी. टीएमसी का यह कदम दर्शाता है कि वह उत्तर बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए स्थानीय दलों के प्रभाव का उपयोग करना चाहती है. अभिषेक बनर्जी ने कहा कि यह तालमेल बंगाल की अखंडता और विकास के साझा संकल्प को पूरा करने के उद्देश्य से किया गया है.
उम्मीदवारों के नामों के ऐलान के साथ ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी तीखे हमले किए. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने आयोग पर पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए. ममता का मानना है कि आयोग का रुख भाजपा के पक्ष में झुका हुआ है और वह उनके लिए एक 'अच्छा खेल' खेल रहा है. उन्होंने आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि बंगाल की जागरूक जनता इस तरह की कोशिशों का सही समय पर मुंहतोड़ जवाब देगी.