नई दिल्ली: ई-20 ईंधन नीति को लेकर केंद्र सरकार और उसके आलोचकों के बीच बहस तेज होती जा रही है. इसी बीच राजनीतिक विश्लेषक और सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने दावा किया है कि उनके प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने उन्हें घर से बाहर निकलने से रोक दिया. पूनावाला का आरोप है कि यह कार्रवाई बिना किसी लिखित आदेश के की गई. वहीं पुलिस का कहना है कि प्रस्तावित मार्च से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी. इस पूरे घटनाक्रम ने नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया है.
तहसीन पूनावाला ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी कि वह ई-20 ईंधन नीति के विरोध में एपीजे अब्दुल कलाम मार्ग से गांधी स्मृति तक अकेले पैदल मार्च करेंगे. इसके साथ ही उन्होंने दिनभर का मौन उपवास रखने की भी योजना बनाई थी. उनका कहना था कि यह पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध होगा, जिसमें किसी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था का सवाल नहीं था.
पूनावाला ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि शुक्रवार सुबह पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया. उनके अनुसार पुलिस ने न तो कोई लिखित आदेश दिखाया और न ही हिरासत से जुड़ा कोई दस्तावेज दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें प्रभावी रूप से घर में नजरबंद कर दिया गया और मीडिया से भी मिलने नहीं दिया गया.
वीडियो में पुलिस अधिकारियों और पूनावाला के बीच बातचीत भी दिखाई देती है. पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा कि प्रस्तावित मार्च में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की आशंका थी, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बन सकती थी. इसी कारण उन्हें बाहर जाने से रोका गया. हालांकि पूनावाला ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए इसे नागरिक अधिकारों का उल्लंघन बताया.
पूनावाला लंबे समय से ई-20 ईंधन नीति का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि पुराने वाहनों के मालिकों के लिए केवल ई-20 ईंधन का विकल्प उचित नहीं है. उन्होंने मांग की है कि पेट्रोल पंपों पर पारंपरिक पेट्रोल के साथ ई-5 और ई-10 मिश्रण भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि वाहन मालिक अपनी जरूरत के अनुसार ईंधन चुन सकें. उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की नीतियों की भी आलोचना की है.
ई-20 पेट्रोल के चरणबद्ध विस्तार को लेकर पहले भी अलग-अलग उपभोक्ता संगठनों और कुछ विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए हैं. कई पुराने वाहन मालिकों का कहना है कि इससे माइलेज प्रभावित होता है और रखरखाव का खर्च बढ़ सकता है. दूसरी ओर सरकार इसे इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने, आयातित तेल पर निर्भरता घटाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है. ऐसे में पूनावाला का विरोध इस बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है.