नई दिल्ली: तमिलनाडु में 9 अप्रैल को मतदान होगा. चुनाव आयोग की घोषणा के साथ ही राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. मैट्राइज-आईएएनएस के ताजा ओपिनियन पोल के अनुसार, राज्य में इस बार सत्ता परिवर्तन के साफ संकेत मिल रहे हैं. जहां वर्तमान सत्ताधारी डीएमके गठबंधन पिछड़ता दिख रहा है, वहीं एनडीए बहुमत की ओर बढ़ता नजर आ रहा है. इसी बीच, अभिनेता विजय की नई पार्टी टीवीके की एंट्री और भाजपा के साथ उनके संभावित गठबंधन ने मुकाबले को और भी रोचक बना दिया है.
ओपिनियन पोल के आंकड़ों के अनुसार, सत्ताधारी डीएमके और उसके सहयोगियों को 104 से 114 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. इसके विपरीत, एआईडीएमके और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को 114 से 127 सीटें मिल सकती हैं. ये आंकड़े स्पष्ट रूप से संकेत दे रहे हैं कि तमिलनाडु की जनता इस बार बदलाव के मूड में है. एनडीए को बहुमत मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है, जो वर्तमान सरकार के लिए बड़ी चिंता का विषय है.
इस चुनाव में अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी 'टीवीके' को सर्वे में 6 से 12 सीटें मिलने का अनुमान है. भले ही यह संख्या कम लगे, लेकिन त्रिकोणीय संघर्ष में ये सीटें हार और जीत का फैसला करने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं. विजय ने शुरुआत से ही अपनी पार्टी को एक तीसरे विकल्प के तौर पर पेश किया है. उनकी मौजूदगी ने राज्य की पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के समीकरणों को चुनौतीपूर्ण और अस्थिर बना दिया है.
भारतीय जनता पार्टी राज्य में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने के लिए विजय को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है. खबरों के अनुसार, भाजपा ने विजय को एनडीए गठबंधन में शामिल होने का खुला निमंत्रण दिया है. पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि यदि विजय उनके साथ आते हैं, तो चुनावी नतीजे पूरी तरह उनके पक्ष में पलट सकते हैं. यह कदम विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की एक बड़ी सोची-समझी योजना का हिस्सा माना जा रहा है.
भाजपा ने विजय को अपने साथ जोड़ने के लिए उपमुख्यमंत्री पद और चुनाव में 80 सीटों का बड़ा प्रस्ताव रखा है. यह पेशकश विजय की बढ़ती लोकप्रियता और उनके युवा आधार को भुनाने की एक कोशिश है. भाजपा सूत्रों का दावा है कि इस गठबंधन से एनडीए की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी. यदि विजय इस प्रस्ताव पर सहमत होते हैं, तो तमिलनाडु की राजनीति में एक नया और शक्तिशाली सत्ता केंद्र उभर सकता है, जो भविष्य की राजनीति को प्रभावित करेगा.
हालांकि, विजय के लिए यह निर्णय लेना काफी कठिन और जोखिम भरा साबित हो सकता है. उनके करीबी सलाहकारों का मानना है कि किसी भी गठबंधन में शामिल होने से उनकी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान धूमिल हो सकती है. विजय अब तक खुद को स्थापित दलों से अलग बताते रहे हैं. अचानक किसी पाले में जाने से उनके समर्थकों के बीच गलत संदेश जा सकता है, जो उनकी 'तीसरे पक्ष' वाली छवि को नुकसान पहुंचा सकता है.