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'अगर कुछ गैरकानूनी मिला तो...', SIR विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसलों पर मांगा रिकॉर्ड

 SIR विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तत्काल कार्रवाई से इनकार किया, लेकिन Form 6 समेत विवादित फैसलों के रिकॉर्ड चुनाव आयोग से मांगे.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'अगर कुछ गैरकानूनी मिला तो...', SIR विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसलों पर मांगा रिकॉर्ड
Courtesy: ani

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग पर फिलहाल कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया. हालांकि, अदालत ने चुनाव आयोग से उन फैसलों से जुड़े रिकॉर्ड पेश करने को कहा, जिन्हें याचिका में चुनौती दी गई है. इनमें मतदाताओं के Form 6 में किए गए विवादित बदलाव भी शामिल हैं.

याचिका में क्या आरोप लगाए गए  

पटना निवासी राकेश कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए हैं. याचिका में आरोप लगाया गया है कि CEC के नेतृत्व में कई दिशा-निर्देश और सॉफ्टवेयर से जुड़े बदलाव दूसरे दो चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना किए गए. याचिकाकर्ता ने CEC को निलंबित करने की मांग करते हुए इसे संवैधानिक और वैधानिक व्यवस्था के विपरीत बताया.

 कोर्ट जानना चाहता है किसकी मंजूरी थी  

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि वह यह देखना चाहती है कि विवादित फैसले केवल CEC ने लिए थे या फिर चुनाव आयोग ने सर्वसम्मति अथवा बहुमत से उन्हें मंजूरी दी थी. CJI ने कहा कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद यह भी देखा जाएगा कि Form 6 में बदलाव किसने किया.

बहुमत से फैसला लेने पर जोर  

CJI ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि आयोग में किसी फैसले पर सर्वसम्मति नहीं है, तो उसे बहुमत के आधार पर लिया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो संबंधित निर्णय को रद्द किया जा सकता है. अदालत ने साथ ही स्पष्ट किया कि वह केवल किसी अखबार की रिपोर्ट के आधार पर तत्काल आदेश नहीं दे सकती.

Form 6 को लेकर विवाद  

Form 6 वह आवेदन पत्र है, जिसके जरिए पात्र नागरिक नए मतदाता के रूप में अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन करते हैं. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि विवाद से जुड़ी खबर के संबंध में चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस रिलीज भी मौजूद है और आयोग ने रिपोर्ट का खंडन नहीं किया है.

इस पर CJI ने कहा कि रिपोर्ट सही भी हो सकती है और गलत भी, लेकिन अदालत उसके आधार पर आदेश पारित नहीं कर सकती. इसके लिए चुनाव आयोग का जवाब और संबंधित रिकॉर्ड देखना जरूरी है.

मामला राष्ट्रीय महत्व का बताया गया  

वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने मामले की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में मताधिकार प्रभावित हो रहा है. उन्होंने इसे मुख्य चुनाव आयुक्त के संस्थागत कामकाज से जुड़ा राष्ट्रीय महत्व का विषय बताया. इस पर CJI ने कहा कि अगर किसी तरह की अवैधता सामने आती है तो उसके परिणाम होंगे.

आयोग को जवाब के लिए तय समय नहीं  

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को जवाब देने के लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की. विकास सिंह ने एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा और तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत बताई. उनका कहना था कि देरी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है. CJI ने जवाब दिया कि यदि बाद में अदालत को नियुक्ति प्रक्रिया या संबंधित कार्रवाई में कोई खामी मिलती है, तो वह परिणामों को रद्द करने का अधिकार रखती है.

SIR को लेकर उठे सवाल  

विवाद पिछले महीने सामने आई एक रिपोर्ट के बाद तेज हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR से जुड़े आदेशों और निर्देशों पर रिकॉर्ड में आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि कुछ फैसले उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए.

मतदाता सूची और सॉफ्टवेयर से जुड़े मुद्दे  

रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच दर्ज की गईं. इनमें नए मतदाताओं को जोड़ने, नाम हटाने और बहाल करने, मतदाता संबंधी आदेशों के खिलाफ अपील तथा मतदाता डेटा वाले चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे. कई मामलों में इन आपत्तियों की प्रति CEC ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थी.

चुनाव आयोग का पक्ष  

चुनाव आयोग ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संस्थागत विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया है. आयोग ने यह भी कहा कि उसके सभी आदेशों को पूरा कानूनी आधार प्राप्त है और निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है. सुप्रीम कोर्ट अब रिकॉर्ड और आयोग के जवाब के आधार पर आगे मामले की जांच करेगा.