उत्तर कश्मीर में पहली बार महिलाओं के लिए आयोजित स्पोर्ट्स फेस्टिवल की सोमवार को शुरुआत हुई. तीन दिवसीय इस आयोजन में 18 संस्थानों की करीब 900 युवा महिला खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया. आयोजन का उद्घाटन गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज वूमेन (GDCW) में हुआ. यह प्रतियोगिता 5 से 7 अक्टूबर तक चलेगी.
उच्च शिक्षा विभाग के कमिश्नर सेक्रेटरी राम निवास शर्मा ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि 18 संस्थानों की 900 युवा महिलाओं की भागीदारी केवल खेल प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर के भविष्य की एक तस्वीर पेश करती है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग कॉलेजों और संस्थानों के रंगों वाली वर्दी में मैदान पर उतरीं खिलाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा और उम्मीद का प्रतीक हैं.
राम निवास शर्मा ने खिलाड़ियों को उत्तर कश्मीर की “राजकुमारियां” बताते हुए कहा कि उनकी ऊर्जा घाटी की असली संपत्ति है. उन्होंने खिलाड़ियों से मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की अपील की. उन्होंने कहा कि युवा महिलाएं अपने प्रदर्शन और उपलब्धियों के जरिए जम्मू-कश्मीर को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.
शर्मा ने आयोजन के लिए कॉलेज की प्रिंसिपल और शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग की सराहना की. उन्होंने कहा कि हर परंपरा की शुरुआत किसी न किसी पहले साल से होती है. आने वाले वर्षों में जब यह आयोजन लगातार आगे बढ़ेगा, तब लोग याद करेंगे कि इसकी शुरुआत अक्टूबर 2026 में उत्तर कश्मीर से हुई थी.
शर्मा ने कहा कि महिलाओं के लिए खेल आयोजन करना समाज के लिए महत्वपूर्ण कदम है. उनके मुताबिक, किसी समाज की स्थिति का आकलन वहां महिलाओं की स्थिति देखकर किया जा सकता है. उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि प्रतियोगिता में पहुंचना और मैदान पर उतरना अपने आप में एक उपलब्धि है.
फेस्टिवल के दौरान वॉलीबॉल, कबड्डी, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, कैरम, रस्सी कूद और योग जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी. इन मुकाबलों के जरिए प्रतिभागियों को अलग-अलग खेलों में अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा.
शर्मा ने कहा कि खेल केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं हैं. मैदान खिलाड़ियों को अनुशासन, टीमवर्क, नेतृत्व, खेल भावना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सिखाता है. उन्होंने कहा कि कुछ ऐसी सीख होती हैं, जो कक्षा में नहीं मिलतीं और उन्हें केवल मैदान पर ही सीखा जा सकता है.
उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि खेल उन्हें हार को सहजता से स्वीकार करने, फिर मजबूत होकर लौटने और जीत के दौरान विनम्र रहने की सीख देते हैं. टीम के साथी पर भरोसा करना और दबाव की स्थिति में शांत रहना भी खेलों से सीखा जा सकता है.
जम्मू-कश्मीर में नशे की समस्या का जिक्र करते हुए शर्मा ने कहा कि युवाओं को खेलों की ओर ले जाना समाज की कई बुराइयों से लड़ने में मदद कर सकता है. उन्होंने खेलों को युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने वाले जनआंदोलन का हिस्सा बताया.
शर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि खेल और समग्र विकास को शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग खेलों को केवल अतिरिक्त गतिविधि नहीं, बल्कि शिक्षा का जरूरी हिस्सा मानता है.
उन्होंने कहा कि जब कोई लड़की दर्शकों के सामने मैदान में उतरती है, तो वह खुद और समाज को संदेश देती है कि वह हर क्षेत्र में अपनी जगह बनाने में सक्षम है . खेलों में आत्मविश्वास हासिल करने वाली युवतियां आगे चलकर नौकरी के इंटरव्यू, प्रशासन, सार्वजनिक जीवन और अन्य क्षेत्रों में भी अधिक मजबूती से चुनौतियों का सामना कर सकती हैं .
शर्मा ने खिलाड़ियों से नियमों और रेफरी का सम्मान करने के साथ-साथ प्रतिद्वंद्वी का भी सम्मान करने की अपील की. उन्होंने कहा कि आज मैदान के दूसरी ओर खड़ी खिलाड़ी कल आपकी सहकर्मी, दोस्त या साथी अधिकारी हो सकती है. उनके मुताबिक, हार में शर्म नहीं है, असली असफलता कोशिश न करना है .
कॉलेज प्रबंधन के अनुसार, बारामूला, कुपवाड़ा, बांदीपोरा, हंदवाड़ा, सुंबल, हाजिन, पट्टन, तंगमर्ग और सोपोर के संस्थानों की टीमें इस खेल महोत्सव में हिस्सा ले रही हैं. आयोजकों को उम्मीद है कि यह पहल उत्तर कश्मीर में महिला खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत मंच साबित होगी.