मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को Form 6 में कथित बदलाव को लेकर अहम टिप्पणी की. कोर्ट ने साफ कहा कि नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में किए गए किसी भी बदलाव को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है. अदालत ने यह भी संकेत दिया कि चुनाव आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद वह यह देखेगी कि फॉर्म में बदलाव किसने और किस अधिकार के तहत किया.
Form 6 नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए भरा जाता है. आरोप है कि जुलाई 2026 में चुनाव आयोग के ECINET पोर्टल पर उपलब्ध इसके ऑनलाइन संस्करण में एक नया हिस्सा जोड़ा गया था. इसमें आवेदक से उसके माता-पिता की पिछली Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान मतदाता सूची से संबंधित स्थिति की जानकारी मांगी गई थी. हालांकि, Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित मूल Form 6 में औपचारिक संशोधन नहीं किया गया था.
चुनाव आयोग ने बाद में उन राज्यों में ECINET पोर्टल से SIR संबंधी अतिरिक्त घोषणा को हटा दिया, जहां SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी . आयोग ने 26 सितंबर को कहा था कि गैर-SIR अवधि में Registration of Electors Rules, 1960 के अनुसार निर्धारित फॉर्म ही इस्तेमाल किए जाएंगे .
वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने सुनवाई के दौरान Form 6 में जोड़ी गई नई शर्तों का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली सहित कुछ जगहों पर इन बदलावों के आधार पर नए मतदाताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ा . उन्होंने तर्क दिया कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार Form 6 में इस तरह बदलाव नहीं किया जा सकता .
इस पर CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि “किसी भी संशोधित Form 6 को हमारी मंजूरी नहीं मिली है.” उन्होंने कहा कि जब चुनाव आयोग की रिपोर्ट अदालत के सामने आएगी, तब पीठ यह देखना चाहेगी कि आखिर किसने क्या बदलाव किया था. यह टिप्पणी Form 6 में किए गए कथित अनधिकृत बदलाव को लेकर चल रही कानूनी बहस में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका में आरोप लगाया गया है कि जुलाई 2026 में ECINET पोर्टल पर Form 6 में बिना वैधानिक अधिकार और Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन के बदलाव किया गया. याचिका के मुताबिक, आयोग के एक आयुक्त ने 13 अगस्त को इस बदलाव को “अनधिकृत और अवैध” बताते हुए तत्काल हटाने का निर्देश दिया था. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि बदलाव के कारण पहली बार मतदान करने वाले पात्र युवाओं को अनावश्यक परेशानी हुई.