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India Daily

I-PAC मामले पर ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से लगा बड़ा झटका, प्राइवेसी संबंधी याचिका पर ED को दी ये इजाजत

सुप्रीम कोर्ट ने I-PAC से जुड़े मामले में प्राइवेसी की दलील खारिज करते हुए ED को आरोपी के मोबाइल फोन से जानकारी लेने की अनुमति दी. अदालत ने जांच में हस्तक्षेप से इनकार किया और एजेंसी को राहत दी.

Kanhaiya Kumar Jha
I-PAC मामले पर ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से लगा बड़ा झटका, प्राइवेसी संबंधी याचिका पर ED को दी ये इजाजत
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: I-PAC से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक और कानूनी तौर पर बड़ा झटका माना जा रहा है. दरअसल, अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय को I-PAC के पदाधिकारी जितेंद्र मेहता के मोबाइल फोन से डेटा हासिल करने से रोक लगानी पर साफ इनकार कर दिया है. आपको बता दें कि यह वही मामला है, जिसमें ED ने हवाला के जरिए 20 करोड़ रुपये के लेनदेन का आरोप लगाया है और जिसकी जांच सीधे तौर पर I-PAC और उससे जुड़े राजनीतिक नेटवर्क तक पहुंचती दिख रही है.

यह आदेश उस समय आया है, जब पहले कोलकाता में ED की कार्रवाई को लेकर पश्चिम बंगाल पुलिस और खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मौजूदगी में एजेंसी की सर्च कार्रवाई में बाधा डाली गई थी. उस दौरान ED अधिकारियों से जब्त दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस तक ले लिए गए थे, जिससे जांच प्रभावित हुई थी. इसके उलट, दिल्ली में 8 जनवरी को I-PAC के दफ्तर में हुई तलाशी के दौरान ED को डिजिटल डिवाइस जब्त करने में सफलता मिली थी.

केस को 'निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन' मानने से कोर्ट ने किया इंकार

गुरुवार को हुई सुनवाई में, CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने I-PAC की ओर से सीनियर एडवोकेट सी ए सुंदरम ने दलील दी कि मोबाइल फोन खोलने की अनुमति देना निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा. उन्होंने मांग की कि अगली सुनवाई तक ED को डेटा एक्सेस से रोका जाए. हालांकि, अदालत इस दलील से संतुष्ट नहीं दिखी और स्पष्ट किया कि वह जांच एजेंसी के अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करेगी.

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने भी काफी कुछ संकेत दिया. जब बेंच ने पूछा कि आप इतने डरे हुए क्यों हैं, तो यह साफ हो गया कि अदालत जांच को लेकर गंभीर है. कोर्ट ने यह भी कहा कि वह निर्दोष नागरिक के अधिकारों की रक्षा करना जानती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जांच एजेंसी को रोका जाए. इस रुख को ED के लिए राहत और अप्रत्यक्ष रूप से तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व के लिए झटका माना जा रहा है.

मामले की पृष्ठभूमि को देखें तो ED का दावा है कि हवाला के जरिए कोलकाता से I-PAC के गोवा ऑफिस तक फंड ट्रांसफर हुआ. यह वही I-PAC है, जिसने अतीत में तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीति तैयार की थी. ऐसे में जांच की आंच राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील मानी जा रही है.

मंगलवार को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को उन अन्य मामलों के साथ भी जोड़ दिया है, जिनमें ED की डिजिटल डिवाइस तक पहुंच को चुनौती दी गई थी. इनमें फ्यूचर गेमिंग, न्यूजक्लिक और तमिलनाडु सरकार से जुड़े मामले शामिल हैं. मंगलवार को इन सभी मामलों पर एक साथ सुनवाई होगी. लेकिन फिलहाल, ED को मोबाइल डेटा तक पहुंच से न रोकने का फैसला ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए एक बड़ा संकेत और दबाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है.