नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संदीप दीक्षित ने पार्टी के अपने ही सांसद शशि थरूर पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें पार्टी के लिए अप्रासंगिक बता दिया है. यह बयान ऐसे समय आया है जब केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस की अहम बैठक से शशि थरूर के गैरहाजिर रहने की खबर सामने आई है.
संदीप दीक्षित ने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी के लिए जो नेता प्रासंगिक हैं वही बैठक में शामिल हो रहे हैं. उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसे नेताओं की अनुपस्थिति से कोई फर्क नहीं पड़ता जो पार्टी के बड़े चेहरे नहीं हैं.
Delhi: On Congress MP Shashi Tharoor skipping the Kerala poll meeting, Congress leader Sandeep Dikshit says, "All the strong and senior leaders from Kerala are attending. Those who are relevant to the Congress are coming. It doesn’t make a difference if leaders who are not major… pic.twitter.com/Q8rcOyUHfx
— IANS (@ians_india) January 23, 2026
मीडिया से बातचीत में संदीप दीक्षित ने कहा कि केरल के सभी मजबूत और वरिष्ठ नेता बैठक में मौजूद हैं. उनका कहना था कि जो नेता कांग्रेस के लिए मायने रखते हैं, वही बैठक में आ रहे हैं. दीक्षित के इस बयान को सीधे तौर पर शशि थरूर पर हमला माना जा रहा है.
सूत्रों के मुताबिक शशि थरूर राहुल गांधी के हालिया कोच्चि दौरे के दौरान उनसे मुलाकात न होने से नाराज बताए जा रहे हैं. इसी कारण उन्होंने पार्टी की बैठक में शामिल होने के बजाय केरल लिटरेचर फेस्टिवल में जाने का फैसला किया. इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है.
पिछले कुछ समय से शशि थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच मतभेद की खबरें लगातार सामने आती रही हैं. पिछले साल उन्होंने थॉमस ग्रे का एक प्रसिद्ध कथन सोशल मीडिया पर साझा किया था, जिसे कई लोगों ने पार्टी नेतृत्व पर तंज के रूप में देखा.
इसके बाद एक मलयालम पॉडकास्ट में थरूर ने कहा था कि अगर कांग्रेस ने अपना जनाधार नहीं बढ़ाया तो वह केरल में लगातार तीसरी बार विपक्ष में ही रहेगी. शशि थरूर ने यह भी कहा था कि केरल कांग्रेस में नेतृत्व का अभाव महसूस किया जा रहा है. उन्होंने अपने चार बार सांसद चुने जाने का जिक्र करते हुए यह तक कहा था कि अगर पार्टी को उनकी जरूरत नहीं है तो उनके पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं. इन विकल्पों में उन्होंने किताबें लिखने जैसी बातों का भी उल्लेख किया था.
थरूर और कांग्रेस के रिश्तों में तब और तल्खी आई जब उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र से पहले पार्टी की एक अहम बैठक में हिस्सा नहीं लिया. कांग्रेस सांसद ने केंद्र और केरल राज्य दोनों में सत्ताधारी NDA सरकार की नीतियों की तारीफ करके विवाद खड़ा कर दिया.
कोविड वैक्सीन, रूस-यूक्रेन और ऑपरेशन सिंदूर पर मोदी सरकार की नीतियों की बार-बार तारीफ करने से कांग्रेस ने खुद को उनके विचारों से दूर कर लिया. उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्धविराम का श्रेय डोनाल्ड ट्रंप को देने पर मोदी सरकार का बचाव करने के लिए पार्टी के नैरेटिव के खिलाफ भी बात की.