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मेघालय के वेस्ट गारो हिल्स में भड़की हिंसा, प्रशासन ने लगाया कर्फ्यू, सेना ने संभाला मोर्चा

हिंसा की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने पूरे वेस्ट गारो हिल्स में कर्फ्यू लगा दिया है. प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी तैनात किया जा रहा है.

Anuj
Edited By: Anuj
मेघालय के वेस्ट गारो हिल्स में भड़की हिंसा, प्रशासन ने लगाया कर्फ्यू, सेना ने संभाला मोर्चा
Courtesy: Chat GPT

नई दिल्ली: मेघालय के वेस्ट गारो हिल्स जिले में मंगलवार को अचानक तनाव बढ़ने के बाद हालात बिगड़ गए. स्थिति को काबू में करने के लिए प्रशासन को सेना बुलानी पड़ी. अधिकारियों के अनुसार, चिबिनांग इलाके में सुरक्षा बलों द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान हुई फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई. दोनों मृतक इसी क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं.

जिले के पुलिस अधीक्षक अब्राहम टी संगमा ने बताया कि यह विवाद गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (GHADC) चुनाव को लेकर आदिवासी और गैर-आदिवासी समूहों के बीच शुरू हुआ था. स्थिति तब बिगड़ गई जब बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन करने लगे. पुलिस जब भीड़ को हटाने की कोशिश कर रही थी, उसी दौरान हालात हिंसक हो गए और फायरिंग की घटना हुई.

वेस्ट गारो हिल्स में कर्फ्यू

हिंसा की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने पूरे वेस्ट गारो हिल्स में कर्फ्यू लगा दिया है. प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी तैनात किया जा रहा है. नागरिक प्रशासन के अनुरोध पर सेना की टुकड़ियों को बुलाया गया है.

रक्षा प्रवक्ता महेंदर रावत ने बताया कि सेना के जवान जिले के संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च कर रहे हैं ताकि लोगों में भरोसा कायम हो सके और शांति बहाल की जा सके. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कितनी सैन्य टुकड़ियां तैनात की गई हैं. सामान्य तौर पर सेना की एक कॉलम में करीब 60 से 80 जवान होते हैं. पुलिस अधीक्षक ने कहा कि और सुरक्षा बलों की भी मांग की गई है और वे जल्द पहुंचने वाले हैं.

इंटरनेट सेवाएं 48 घंटे के लिए बंद

वहीं, अफवाहों और भड़काऊ संदेशों को रोकने के लिए मेघालय सरकार ने वेस्ट गारो हिल्स में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 48 घंटे के लिए बंद कर दी हैं. यह प्रतिबंध 10 मार्च से लागू किया गया है. हालांकि लोगों के लिए वॉइस कॉल और एसएमएस सेवाएं जारी रहेंगी. तनाव कम करने के प्रयास में जिले के डिप्टी कमिश्नर विभोर अग्रवाल की अध्यक्षता में तुरा स्थित सर्किट हाउस में शांति समिति की बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में चर्च के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय विकास समितियों के सदस्यों को आमंत्रित किया गया है.

पूर्व विधायक एस्तामुर मोमिन पर हमला

दरअसल, यह पूरा विवाद GHADC चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के दौरान शुरू हुआ. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 मार्च है, जबकि चुनाव 10 अप्रैल को होने वाले हैं. बताया जा रहा है कि सोमवार को पूर्व विधायक एस्तामुर मोमिन जब तुरा में डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में नामांकन दाखिल करने पहुंचे, तो कुछ प्रदर्शनकारियों ने उन पर हमला कर दिया. प्रदर्शन करने वाले लोगों की मांग थी कि गैर-आदिवासी उम्मीदवार परिषद चुनाव में भाग न ले.

इलाके में विवाद और तनाव की स्थिति

इससे पहले 17 फरवरी को GHADC की कार्यकारी समिति ने एक प्रस्ताव पारित किया था. इसमें कहा गया था कि चुनाव में नामांकन दाखिल करते समय उम्मीदवारों को वैध अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा. इसी मुद्दे को लेकर इलाके में विवाद और तनाव की स्थिति पैदा हो गई.