पिछले कुछ दिनों से मेदांता अस्पताल में भर्ती सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सोमवार को डिस्चार्ज कर दिया गया. अस्पताल से छुट्टी मिलते ही सोनम वांगचुक अपनी पत्नी डॉ. गीतांजलि के साथ राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी.
इस मौके पर जब वांगचुक से पूछा गया कि आपने सरकार के प्रतिनिधि के हाथ से (जेपी नड्डा) के हाथ से सूप पीकर अनशन क्यों तोड़ा? इस पर सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकार या किसी बड़े नेता के हाथ से अनशन तोड़ना हमारे लद्दाख में आपकी विजय का प्रतीक माना जाता है. उन्होंने कहा कि हमारे लद्दाख में भी कई आंदोलन हुए हैं वहां पर सरकार के प्रतिनिधि खासकर बड़े नेता के हाथ से अनशन तोड़ना आपकी विजय का प्रतीक माना जाता है. उन्होंने कहा कि जब आंदोलन सफल नहीं होता तो हम छोटी बच्ची या बूड़ी मां के हाथ से अनशन समाप्त करते हैं. वांगचुक ने कहा कि हमने लद्दाख और लेह में अनशन के दौरान ऐसा ही किया था, तो मेरे ख्याल से यह एक सांस्कृतिक अंतर है.
Sonam Wangchuk has now responded to those who were questioning why he ended his hunger strike by accepting soup from J. P. Nadda or another politician.
— Amit Kumar Sindhi (@AMIT_GUJJU) July 27, 2026
According to him, it is actually a positive sign when politicians come forward to help end your hunger strike. He says it is… pic.twitter.com/j0u1eewy0j
महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद वांगचुक ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मैं देश को बताना चाहता हूं कि बापू को दिखाया रास्ता आज भी उतना ही सही और प्रासंगिक है जितना 100 साल पहले था. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन के कारण ही हमारी जीत हुई है. हिंसा होती तो मामला बिगड़ सकता था इसलि मैंने समय से पहले अनशन खत्म किया. बता दें कि वांगचुक नीट पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 26 दिनों तक अनशन पर बैठे थे.
वांगचुक ने आगे कहा कि अब मेरी तबीयत पहले से काफी बेहतर है. मैं धीरे-धीरे खाना खा रहा हूं और शरीर में ताकत लौट रही है. अब में कुछ ही दिनों बाद अपने घर लद्दाख वापस लौट जाऊंगा.