नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए अनुपयुक्त स्थान बताते हुए वैकल्पिक जगह की मांग की गई. याचिकाकर्ता का कहना है कि जंतर-मंतर अब प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त नहीं रह गया है.
याचिका में उल्लेख किया गया कि जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों से आसपास के इलाकों में आवागमन बुरी तरह प्रभावित होता है. आम लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा मेडिकल आपात सेवाओं और जरूरी सामान की सप्लाई में भी बाधा उत्पन्न होती है. याचिका में केंद्र सरकार से अपील की गई कि प्रदर्शनों के लिए कोई अन्य उपयुक्त स्थान तय किया जाए.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले को गंभीरता से लिया. चीफ जस्टिस ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे महत्वपूर्ण लगते हैं. जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों से ट्रैफिक व्यवस्था और मेडिकल जरूरतों पर असर पड़ने की बात सही दिशा में इशारा करती है. उन्होंने सॉलिसिटर जनरल से इस मामले में केंद्र सरकार के निर्देश लेने को कहा.
शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट ने मामले को अलग से सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया ताकि इस पर विस्तार से विचार किया जा सके. चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि यह विषय गंभीर है और इस पर समुचित ध्यान देने की आवश्यकता है.
सुनवाई के दौरान वकील ने अदालत को बताया कि अरविंद केजरीवाल ने एक टाउनहॉल बैठक का आयोजन किया है. साथ ही प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकालने का फैसला भी लिया गया है. वकील ने कहा कि 20 जुलाई जैसी घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए. इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि प्रशासन को स्थिति संभालने का पूरा अनुभव है. अगर कोई गड़बड़ी होती है तो संबंधित पक्ष कोर्ट का रुख कर सकते हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि व्यवस्था संभाल ली जाएगी.
यह याचिका दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों की व्यवस्था को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद को फिर से चर्चा में लाई है. जंतर-मंतर पिछले कई वर्षों से राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का पसंदीदा प्रदर्शन स्थल रहा है.