नई दिल्ली: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार द्वारा कुछ चीजें स्पष्ट करने के बाद उनकी पार्टी समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर अपना रुख तय करेगी. इसके साथ ही उन्होंने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किए जाने पर जोर दिया. पवार ने अपनी बेटी और राकांपा सांसद सुप्रिया सुले सहित विभिन्न विपक्षी नेताओं को ‘‘निशाना'' बनाए जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना की और कहा कि ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री पटना में विपक्ष की हालिया बैठक से परेशान हैं.
प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में समान नागरिक संहिता की वकालत किए जाने का जिक्र करते हुए पवार ने यहां संवाददाताओं से कहा कि विधि आयोग को अब तक यूसीसी पर 900 से अधिक सुझाव मिले हैं. राकांपा नेता ने कहा कि सिख, जैन और ईसाई जैसे समुदायों के रुख का पता लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें पता लगा है कि सिख समुदाय का एक अलग नजरिया है.
पवार ने कहा, 'वे यूसीसी का समर्थन करने के मूड में नहीं हैं... इसलिए सिख समुदाय (उसकी राय) के संज्ञान के बिना यूसीसी पर फैसला करना उचित नहीं होगा.' उन्होंने कहा कि यह भी संभव है कि ध्यान भटकाने के लिए यूसीसी का मुद्दा उठाया जा रहा हो क्योंकि जो लोग सत्ता में हैं, उनके प्रति नाराजगी है. पवार ने कहा कि बुधवार को दिल्ली में राकांपा पदाधिकारियों की राष्ट्रीय स्तरीय बैठक में कुछ नेताओं ने कहा कि यूसीसी मुद्दा उठाने से पहले केंद्र को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने पर फैसला करना चाहिए.
उन्होंने कहा, 'जब मैं राज्य (महाराष्ट्र) का मुख्यमंत्री था, हमने स्थानीय निकाय चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया था. बाद में इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया। उसके बाद इस फैसले को राष्ट्रीय स्तर पर दोहराया गया. अब हम इस बात पर जोर देते हैं कि महिलाओं के लिए समान आरक्षण नीति विधानसभाओं और संसद में भी अपनाई जानी चाहिए.''
पवार ने कहा कि भाजपा को यकीन नहीं है कि आगामी चुनाव में क्या होगा, इसलिए प्रधानमंत्री ने कुछ ऐसे बयान दिये जो उनके पद को शोभा नहीं देता. राकांपा नेता ने कहा, ''उदाहरण के लिए, उन्होंने मेरी पार्टी के खिलाफ टिप्पणी की...उन्होंने कहा कि यदि आप (लोग) सुप्रिया सुले को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो आप राकांपा को वोट दे सकते हैं.''