नई दिल्ली 17 जनवरी (भाषा): दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2017 के उन्नाव बलात्कार मामले में भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर को चिकित्सा आधार पर दी गई अंतरिम जमानत बढ़ाने से शुक्रवार को इनकार कर दिया और उन्हें आत्मसमर्पण करने को कहा. न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा की पीठ ने अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने संबंधी सेंगर की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया और मामले को 27 जनवरी को किसी अन्य पीठ के समक्ष रखने का निर्देश दिया. न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा ने 2019 में निचली अदालत के न्यायाधीश के रूप में सेंगर को मामले में दोषी ठहराया था और सजा सुनाई थी.
न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि हम इसमें शामिल नहीं हो रहे हैं. आप पहले आत्मसमर्पण करें, हम (उच्च न्यायालय) इस पर विचार करेंगे. सेंगर के वकील ने इस आधार पर समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया कि अगले सप्ताह एम्स में उनकी आंख की सर्जरी होनी है.
अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने की अपील
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के वकील ने कहा कि 20 दिसंबर को अंतरिम जमानत की अवधि एक महीने के लिए बढ़ाते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि इस अवधि को आगे नहीं बढ़ाया जायेगा तथा उन्हें 20 जनवरी को जेल अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करने को कहा था. मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सेंगर को उसके स्वास्थ्य के आधार पर दिसंबर की शुरुआत में दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दी गई थी, जिसे बाद में एक और महीने के लिए बढ़ा दिया गया था.
कथित तौर पर लड़की का अपहरण और दुष्कर्म
अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने के लिए सेंगर की याचिका बलात्कार मामले में दिसंबर 2019 के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उसकी अपील का हिस्सा है, जो उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है. उसने इसे रद्द करने का अनुरोध किया है. पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े मामले में अंतरिम जमानत बढ़ाने की उसकी याचिका भी एक अन्य पीठ के समक्ष लंबित है. सेंगर ने 2017 में कथित तौर पर लड़की का अपहरण किया था और उसके साथ दुष्कर्म किया था, जब वह नाबालिग थी. एक अगस्त, 2019 को उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर बलात्कार का मामला और अन्य संबंधित मामले उत्तर प्रदेश की एक निचली अदालत से दिल्ली स्थानांतरित कर दिए गए थे.
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