कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, अब लोकसभा में विपक्ष के नेता होंगे. कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार शाम को ऐलान किया कि सीनियर नेता और रायबरेली से सांसद राहुल गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता होंगे. कांग्रेस प्रमुख के आवास पर इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने अहम बैठक बुलाई, जिसके बाद ये फैसला लिया गया. कांग्रेस पार्टी के संगठन प्रभारी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया है कि पार्टी ने प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि महताब को पत्र लिखकर इस फैसले की जानकारी दी है. लोकसभा में अब राहुल गांधी का कद बढ़ गया है.
कांग्रेस के पास लीडर ऑफ ओपोजिशन चुने जाने के लिए सदन में 10 फीसदी सीटें अब आ गई हैं. हैं. सदन में नेता प्रतिपक्ष का रोल बेहद अहम होता है. उसके पास संवैधानिक ताकतें होती हैं और कई समितियों में उसकी भूमिका, सत्तापक्ष से जरा भी कम नहीं होती है. अब CBI के डायरेक्टर, सेंट्रल विजिलेंस कमिश्नर, मुख्य सूचना आयुक्त, राष्ट्रीय मानवाधिकार के चेयरमैन, चुनाव आयोग के मुख्य चुना आयुक्त जैसे पदों के चुनाव में उनकी अहम भूमिका होगी. वे इन पदों पर चयनित करने वाली समितियों के सदस्य होंगे. राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनते ही अब उनकी 'सहमति' बेहद अहम हो गई है.
- राहुल गांधी शैडो कैबिनेट बना सकते हैं, जिसके जरिए वे सरकार के काम काज पर नजर रख सकते हैं.
- राहुल गांधी के पास आर्थिक फैसलों की समीक्षा करने की ताकत आ जाएगी.
- राहुल गाधी लोक लेखा समिति के प्रमुख होंगे, जो सरकार के खर्चों की जांच करती है.
- राहुल गांधी सरकारी खर्चों पर अपना पक्ष रख सकते हैं.
- राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनते ही उन्हें कैबिनेट मंत्री की तरह सुविधाएं मिलेंगे, सरकारी सचिवालय में उन्हें दफ्तर एलॉट किया जाएगा.
- उन्हें करीब 3 लाख रुपये का वेतन और भत्ता मिलेगा.
- राहुल गांधी को उच्च स्तरीय सुरक्षा मिलेगी.
- राहुल गांधी का भी बंगा, कैबिनेट मंत्रियों की तरह खास होगा.
- राहुल गांधी सरकारी खर्चे पर हवाई यात्रा, रेल यात्रा कर सकेंगे.
लोकसभा में नेता विपक्ष का दर्जा मिलने के बाद सरकार की हर नीतियों की आलोचना का हक, उन्हें लोकसभा में सत्र के दौरान मिलता है. दोनों सदनों से इस पद को साल 1977 में संवैधानिक मान्यता दी गई है. विपक्ष के नेता का जिक्र संविधान में नहीं हैं, संसदीय संविधि में है. यहीं से उन्हें ताकत मिलती है.