संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर तीन दिवसीय चर्चाजारी है. गुरुवार को रात 1 बजे तक बस चली और शुक्रवार को भी जारी रही. आज शाम 4 बजे लोकसभा में इस अहम बिल पर वोटिंग प्रस्तावित है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर सांसदों से पूर्ण संवेदनशीलता के साथ मतदान करने की अपील की है.
संसद में जोरदार बहस जारी है. यह संशोधन 2023 में पारित मूल कानून को व्यावहारिक रूप देने के लिए आवश्यक है, ताकि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिल सके. बहस के दौरान कई सदस्यों ने विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय रखी. विपक्षी सदस्यों के कुछ सवालों पर भी विस्तार से चर्चा हुई.
वोटिंग से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट में सांसदों को संबोधित किया. उन्होंने लिखा कि चार दशकों तक इस मुद्दे पर राजनीति होती रही, अब समय आ गया है कि देश की आधी आबादी को उसके हकदार अधिकार मिलें. पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के इतने दशकों बाद भी महिलाओं का निर्णय प्रक्रिया में इतना कम प्रतिनिधित्व रहना ठीक नहीं है. उन्होंने सभी सांसदों से अनुरोध करते हुए अपील की कि वे पूरी संवेदनशीलता और सोच-विचार के साथ फैसला लें तथा महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करें. एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री ने भावुक अपील की. उन्होंने लिखा कि अपने घर में मां, बहन, बेटी और पत्नी को याद कीजिए और फिर अपनी अंतरात्मा को सुनिए.
संसद में इस समय नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर चर्चा चल रही है। कल रात भी एक बजे तक चर्चा चली है।
— Narendra Modi (@narendramodi) April 17, 2026
जो भ्रम फैलाए गए, उनको दूर करने के लिए तर्कबद्ध जवाब दिया गया है। हर आशंका का समाधान किया गया है। जिन जानकारियों का अभाव था, वो जानकारियां भी हर सदस्य को दी गई हैं। किसी के मन…
पीएम मोदी ने लिखा कि देश की करोड़ों महिलाओं की नजर हम सभी पर है. उनकी भावनाओं को आहत करने वाला कोई भी कदम नहीं उठाया जाना चाहिए. पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि यह संशोधन सर्वसम्मति से पारित होने पर न केवल नारी शक्ति सशक्त होगी, बल्कि भारतीय लोकतंत्र भी और मजबूत बनेगा. यह संशोधन 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले आरक्षण लागू करने का मार्ग प्रशस्त करेगा. साथ ही परिसीमन प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा हो रही है, ताकि दक्षिणी राज्यों की चिंताओं का समाधान हो सके. सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी और लोकतंत्र अधिक समावेशी बनेगा.