नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक खबर तेजी से वायरल हो रही थी. इसमें दावा किया गया कि अमेरिका ने ईरान पर हमला करने के लिए भारत से अपनी सैन्य सुविधाओं के इस्तेमाल की इजाजत मांगी है. इस दावे ने सुरक्षा हलकों में हलचल मचा दी. लेकिन अब विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि यह पूरी तरह से झूठी और बेबुनियाद खबर है.
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट के जरिए इन दावों की पोल खोल दी. मंत्रालय ने लिखा कि यह ‘फेक न्यूज अलर्ट’ है और लोगों को ऐसे झूठे और मनगढ़ंत दावों से सावधान रहने की जरूरत है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने भारत से ऐसी कोई सैन्य मदद नहीं मांगी है और न ही ऐसी कोई घटना हुई है.
यह वायरल दावा एक पत्रकार के सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ था. उन्होंने आरोप लगाया था कि अमेरिका LEMOA समझौते के तहत भारत से पश्चिमी तट पर अपनी सैन्य संपत्ति तैनात करने की अनुमति मांग रहा है. पोस्ट में कोंकण तट के पास ऑफशोर तैनाती की अटकलें लगाई गईं और इसे ईरान-अमेरिका संघर्ष से जोड़ा गया.
Fake News Alert!
— MEA FactCheck (@MEAFactCheck) March 21, 2026
Please stay alert against such false and baseless claims and posts on social media! pic.twitter.com/oKRc2kefAo
लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट यानी LEMOA भारत और अमेरिका के बीच 2016 में हुआ एक द्विपक्षीय समझौता है. इसके तहत दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल ईंधन भरने, मरम्मत और आपूर्ति जैसे कामों के लिए कर सकती हैं. यह समझौता प्रतिपूर्ति के आधार पर काम करता है.
वायरल पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि अमेरिकी विमानवाहक पोत कोंकण तट के पास लंगर डालेगा और उसे भारतीय सुविधाओं का इस्तेमाल कराया जाएगा. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय नौसेना का कोई भी बर्थ इतना लंबा नहीं है कि वह इतने बड़े विमानवाहक पोत को जगह दे सके. ऐसे में यह दावा तकनीकी रूप से भी असंभव है.
विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि यह पूरी खबर गलत और भ्रामक है. मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी अनधिकृत पोस्ट से सावधान रहें. सरकार का कहना है कि ऐसे दावे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गलत संदेश फैलाते हैं और जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है.
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट संकेत दिया है कि ऐसी किसी भी तरह की सैन्य सहायता की न तो मांग हुई है और न ही कोई समझौता हुआ है. सुरक्षा एजेंसियां भी सोशल मीडिया पर फैल रही इस तरह की अफवाहों पर नजर बनाए हुए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के दावे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की तटस्थ छवि को नुकसान पहुंचा सकते थे, लेकिन समय रहते सरकार की सतर्कता से यह टल गया.