नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमाता जा रहा है. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और चुनाव आयोग आमने-सामने आ गए हैं. ममता ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया को मनमाना और अव्यवस्थित करार दिया है. उनका आरोप है कि एसआईआर के मौजूदा स्वरूप से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं. इसी मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव भी तेज हो गया है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीन जनवरी को मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजे पत्र में कहा कि राज्य में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण कई खामियों से भरा है. उनके अनुसार यह प्रक्रिया न तो योजनाबद्ध है और न ही पारदर्शी तरीके से लागू की जा रही है. ममता ने इसे संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा बताया. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसे बिना सुधार जारी रखा गया, तो इसके गंभीर और दूरगामी परिणाम होंगे.
अपने पत्र में ममता बनर्जी ने आशंका जताई कि एसआईआर के कारण बड़ी संख्या में वैध मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि इससे जनप्रतिनिधित्व कमजोर होगा और लोगों का लोकतांत्रिक प्रक्रिया से भरोसा उठ सकता है. मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से मांग की कि या तो तुरंत इसकी कमियों को दूर किया जाए या फिर इस पूरी प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोका जाए.
ममता बनर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एसआईआर के दौरान अगर कोई गैरकानूनी कार्रवाई होती है, तो उसकी जिम्मेदारी सीधे चुनाव आयोग की होगी. उनका कहना है कि आयोग की निगरानी में चल रही किसी भी प्रक्रिया से नागरिकों के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं, तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने इसे प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लोकतंत्र पर सीधा प्रहार बताया.
इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने दक्षिण 24 परगना से एक महीने लंबे ‘अबार जितबे बांग्ला’ अभियान की शुरुआत की. यह यात्रा आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सरकार की उपलब्धियां जनता तक पहुंचाने पर केंद्रित है. साथ ही इसका मकसद भाजपा को कई मुद्दों पर घेरना भी है. एसआईआर को लेकर बढ़ा विवाद इस अभियान की पृष्ठभूमि में अहम भूमिका निभा रहा है.
एक जनसभा को संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी ने भाजपा पर पश्चिम बंगाल को बदनाम करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राज्य में बांग्लादेशी और रोहिंग्या मतदाताओं के कथित मुद्दे को बेवजह उछाला जा रहा है. अभिषेक ने दावा किया कि हाल ही में दिल्ली दौरे के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनसे इस तरह के नाम हटाने को लेकर सवाल पूछे थे. टीएमसी का कहना है कि इस बहाने असली मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है.