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India Daily

अमेरिका की एंट्री से बदला वेनेजुएला के तेल का खेल, जानें भारत पर कैसे होगी पैसों की बरसात?

अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन से भारत के लिए नए अवसर बनते दिख रहे हैं. अटका हुआ करीब एक अरब डॉलर बकाया मिलने और तेल उत्पादन दोबारा शुरू होने की उम्मीद जगी है.

Kanhaiya Kumar Jha
अमेरिका की एंट्री से बदला वेनेजुएला के तेल का खेल, जानें भारत पर कैसे होगी पैसों की बरसात?
Courtesy: Gemini AI

नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है. भारत सरकार ने इस घटनाक्रम पर चिंता जताई है, लेकिन इसके आर्थिक और रणनीतिक नतीजे भारत के पक्ष में जा सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से भारत को वेनेजुएला में फंसा पुराना बकाया वापस मिलने और तेल क्षेत्र में दोबारा सक्रिय होने का रास्ता खुल सकता है.

वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई के बाद भारत सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति पर चिंता जताई. नई दिल्ली ने क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन की बात कही. हालांकि कूटनीतिक सतर्कता के बीच ऊर्जा विशेषज्ञ इस घटनाक्रम को भारत के लिए संभावित अवसर के रूप में देख रहे हैं. लंबे समय से रुके भारत-वेनेजुएला ऊर्जा संबंधों में अब नई गति आने की संभावना जताई जा रही है.

कभी बड़ा तेल साझेदार था वेनेजुएला

एक समय भारत, वेनेजुएला से कच्चे तेल का बड़ा खरीदार रहा है. भारत रोजाना चार लाख बैरल से ज्यादा तेल वेनेजुएला से आयात करता था. लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते 2022 में भारत को यह आयात बंद करना पड़ा. इन प्रतिबंधों ने न सिर्फ व्यापार रोका, बल्कि भारतीय कंपनियों के निवेश और उत्पादन को भी बुरी तरह प्रभावित किया.

ओएनजीसी का अटका बकाया और उत्पादन संकट

ओएनजीसी विदेश लिमिटेड पूर्वी वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र में साझेदार है. अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण जरूरी तकनीक और उपकरण नहीं मिल सके, जिससे उत्पादन घटकर केवल पांच से दस हजार बैरल प्रतिदिन रह गया. वेनेजुएला सरकार ने 2014 तक 53 करोड़ डॉलर का लाभांश भुगतान नहीं किया. बाद में भी करीब इतनी ही राशि बकाया रह गई, जिससे कुल दावा लगभग एक अरब डॉलर तक पहुंच गया.

प्रतिबंधों में ढील से नई उम्मीद

ऊर्जा अधिकारियों का मानना है कि अमेरिकी नियंत्रण के बाद वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है. अगर ऐसा होता है तो ओएनजीसी सैन क्रिस्टोबल क्षेत्र में आधुनिक उपकरण भेजकर उत्पादन बढ़ा सकेगी. बढ़े हुए उत्पादन से न सिर्फ तेल आपूर्ति सुधरेगी, बल्कि पुराने बकाए की वसूली भी संभव हो पाएगी. यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

रूस से दूरी और नए विकल्प

वेनेजुएला में बदलाव का असर भारत की तेल रणनीति पर भी पड़ सकता है. अमेरिका की नाराजगी के बाद भारत पहले ही तेल खरीद में विविधता की कोशिश कर रहा है. वेनेजुएला से आपूर्ति बढ़ने पर रूस से तेल आयात में कमी आ सकती है. इसके अलावा ओएनजीसी और अन्य भारतीय कंपनियां कैराबोबो-1 जैसे भारी तेल क्षेत्रों में निवेश बढ़ा सकती हैं. माना जा रहा है कि PdVSA के पुनर्गठन में भी अमेरिका की अहम भूमिका होगी, जिससे भारत को नए अवसर मिल सकते हैं.