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MP Assembly Election: BJP के लिए आसान है भोजपुर की राह, यहां फीकी पड़ सकती है कांग्रेस की राजनीति

भोजपुर विधानसभा सीट पर 1977 से ही भारतीय जनता पार्टी का कब्जा रहा है. इस सीट से बीजेपी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा पिछले तीन चुनावों से लगातार कांग्रेस के प्रत्याशी को मात देते हुए क्षेत्र के विधायक बने हुए हैं.

Abhiranjan Kumar
MP Assembly Election: BJP के लिए आसान है भोजपुर की राह, यहां फीकी पड़ सकती है कांग्रेस की राजनीति

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इस साल के अंत में होने वाले चुनाव में बीजेपी एक बार फिर अपना दमखम दिखाने को तैयार तो वहीं कांग्रेस (Congress) के भविष्य को लेकर ये चुनाव बेहद अहम साबित होने वाला है. चुनावी रण में दोनों ही बड़ी पार्टियां अभी से मैदान में कूद पड़ी हैं. तो चलिए एक नजर डालते हैं राजधानी भोपाल से जुड़ी भोजपुर विधानसभा सीट (Bhojpur Assembly Seat) पर. ये सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है. भोजेश्वर मंदिर वाले से इस नगर का सियासी समीकरण दिलचस्प है.

बीजेपी का दबदबा

भोजपुर विधानसभा सीट पर 1977 से ही भारतीय जनता पार्टी का कब्जा रहा है. महज दो बार ही 1967 में कांग्रेस के गुलाबचंद और 2003 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजेश पटेल विधानसभा क्षेत्र से विजय हुए थे. बाकि समय इस विधानसभा पर भारतीय जनता पार्टी का दबदबा रहा है. यहां ये भी बता दें कि भोजपुर महादेव की नगरी है और यहां विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थित है. इसे परमार कालीन राजा भोज ने बनवाया था.

बीजेपी की जीत, कांग्रेस रही नाकाम

भोजपुर विधानसभा सीट रायसेन जिले में आने वाली चार विधानसभा में से एक है. इस सीट से बीजेपी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा पिछले तीन चुनावों से लगातार कांग्रेस के प्रत्याशी को मात देते हुए क्षेत्र के विधायक बने हुए हैं. यहां ये कहना गलत नहीं होगा कि कांग्रेस की हर सियासी चल इस विधानसभा सीट पर नाकाम साबित नजर आ रही है.

पिछले 3 चुनावों के नतीजे

अगर चुनावी समीकरण की बात की जाए तो भोजपुर विधानसभा में बीजेपी के सुरेंद्र पटवा ने 2018 के विधानलभा चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी को 29,486 वोटों से शिकस्त दी थी. इस चुनाव में सुरेंद्र पटवा को 53 फीसदी वोट मिले थे तो वही कांग्रेस के सुरेश पचौरी को महज 36 प्रतिशत वोट ही मिल पाए थे. 2013 के विधानसभा चुनाव में सुरेंद्र पटवा को 51 प्रतिशत वोट मिले थे और उन्होंने जीत का परचम लहराया था. साल 2008 में सुरेंद्र पटवा का मुकाबला कांग्रेस के राजेश पटेल से हुआ था जिसमें राजेश पटेल को हार का सामना करना पड़ा था.

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क्या कहते हैं आंकड़े

मध्य प्रदेश की भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओ की संख्या 2 लाख 34 हजार 356 है. जहां 1 लाख 24 हजार 107 पुरुष मतदाता और 1 लाख 10 हजार 231 महिला वोटर हैं. जातिगत समीकरण पर नजर डाली जाए तो इस विधानसभा में सर्वाधिक एसटी 65 हजार, एससी 35 हजार, मीणा 30 हजार और मुस्लिम वोटर 35 हजार से अधिक हैं. इसके अलावा किरार, ब्राह्मण, नागर, लोधी, राजपूत ठाकुर, जैन, सिख और कुर्मियों में सभी की संख्या 10-10 हजार के आसपास है. इस क्षेत्र में एससी और एसटी एक बड़ा वोटबैंक है जो चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाने में मदद करता है.

कांग्रेस की परेशानी

भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की सबसे बड़ी परेशानी कोई चेहरा नहीं होना है. कांग्रेस के सबसे बड़े नेताओं में से एक कहे जाने वाले सुरेश पचौरी को भी भोजपुर से हार का सामना करना पड़ा है. इस बार भी कांग्रेस की मुश्किलें आसान नहीं होने वाली हैं क्योंकि अभी तक कांग्रेस के पास कोई चेहरा नजर नहीं आ रहा है. कांग्रेस की इस कमी का सीधा लाभ बीजेपी को मिलता दिख रहा है.

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