नई दिल्ली: कोरोना महामारी के कारण लंबे समय से टली हुई भारत की जनगणना अब अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रही है. यह 16वीं जनगणना होगी जो फरवरी 2027 तक चलेगी. पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से होगी जिसमें नागरिक खुद भी जानकारी दे सकेंगे. हाल ही में सरकार ने स्पष्ट किया है कि लिव-इन में रहने वाले जोड़े अगर अपने रिश्ते को स्थायी यूनियन मानते हैं तो उन्हें विवाहित माना जाएगा. साथ ही जनगणना अधिकारियों द्वारा अनुचित या आपत्तिजनक सवाल पूछने पर सख्त दंड का प्रावधान है. महापंजीयक और जनगणना आयुक्त ने सभी राज्यों को इस संबंध में दिशानिर्देश जारी किए हैं.
महापंजीयक और जनगणना आयुक्त के अनुसार अगर लिव-इन में रहने वाला जोड़ा अपने रिश्ते को स्थायी संबंध या स्टैबल यूनियन मानता है तो जनगणना में उन्हें शादीशुदा जोड़े की तरह गिना जाएगा. यह फैसला सामाजिक बदलाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. इससे जनगणना के आंकड़े वास्तविकता के करीब होंगे. अधिकारी सिर्फ इस बात पर ध्यान देंगे कि दोनों व्यक्ति खुद को स्थायी साथी मानते हैं या नहीं.
सरकार ने लोगों को आश्वासन दिया है कि जनगणना के दौरान दी गई कोई भी निजी जानकारी किसी के साथ साझा नहीं की जाएगी. सेंसस एक्ट 1948 की धारा 15 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जनगणना से प्राप्त जानकारी गोपनीय रहेगी. इसका उल्लंघन करने पर सख्त सजा का प्रावधान है. इससे नागरिकों में विश्वास बढ़ेगा और वे बिना डर के सही जानकारी देंगे.
जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर साफ किया है कि कोई भी अधिकारी जानबूझकर आपत्तिजनक या अनुचित सवाल पूछे तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी. सेंसस एक्ट 1948 की धारा 11 के तहत ऐसे अधिकारी को एक हजार रुपये तक जुर्माना या तीन साल तक की जेल या दोनों सजा हो सकती है. इसमें गलत जानकारी देना या बिना अनुमति जानकारी लीक करना भी शामिल है.
जनगणना दो चरणों में होगी. पहले चरण में अप्रैल से सितंबर 2026 तक आवासीय सूची और आवास गणना होगी. इसमें मकान की सुविधाओं जैसे पानी, शौचालय, बिजली, ईंधन और इंटरनेट के अलावा रेडियो, टीवी, कंप्यूटर और वाहनों जैसी चीजों की जानकारी ली जाएगी. दूसरे चरण में फरवरी 2027 में आबादी गणना होगी जिसमें नाम, उम्र, लिंग, वैवाहिक स्थिति, जाति, धर्म, शिक्षा, भाषा, रोजगार और दिव्यांगता जैसी जानकारियां शामिल होंगी.
दूसरे चरण में परिवार के सदस्यों की विस्तृत जानकारी ली जाएगी. शादीशुदा महिलाओं से उनके बच्चों से जुड़ी जानकारी भी मांगी जाएगी. साथ ही दिव्यांग होने या रोजगार की स्थिति पूछी जाएगी. पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी जिसमें स्व-गणना का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा. इससे समय बचेगा और आंकड़े ज्यादा सटीक होंगे. सरकार का प्रयास है कि जनगणना पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल हो.
यह जनगणना देश की विकास योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी. सही आंकड़ों से सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास जैसी योजनाएं बेहतर तरीके से बना सकेगी. लिव-इन संबंधों को मान्यता देने से सामाजिक वास्तविकता सामने आएगी. गोपनीयता और अधिकारियों पर नजर रखने से प्रक्रिया में विश्वास बढ़ेगा. आम नागरिकों को भी सहयोग करना चाहिए ताकि देश का सही चित्र उभरे.