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India Daily

22 साल पहले प्रेम में हारकर जोड़े ने कर ली थी खुदकुशी, अब बेटे की अधूरी शादी को पूरा कर रहे मां-बाप

तेलंगाना के महबूबाबाद जिले में एक अनोखा प्यार का मामला सामने आया है. जिसमें अधूर प्रेम की कहानी को युवक के मां-बाप उसकी मौत के बाद भी पूरा कर रहे हैं. इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है.

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Edited By: Shanu Sharma
22 साल पहले प्रेम में हारकर जोड़े ने कर ली थी खुदकुशी, अब बेटे की अधूरी शादी को पूरा कर रहे मां-बाप
Courtesy: X (@telanganaahead)

हर साल श्री राम नवमी के मौके पर तेलंगाना के महबूबाबाद जिले में एक अनोखा नजारा देखने को मिलता है. इस दिन जिले के एक दंपति अपने दिवंगत बेटे और उसकी प्रेमिका के प्यार को पूरा करने की रस्में करते हैं. जिसमें पूरे गांव के लोग शामिल होते हैं. यह रस्म पिछले 22 साल से लगातार निभाई जा रही है.

लालू और सुक्कम्मा के इकलौते बेटे राम कोटी की शादी 2003 में तय हो रही थी. हालांकि लड़की के परिवार वाले इस रिश्ते से खुश नहीं थे, उन्होंने इसका विरोध किया. विरोध सहन न कर पाने पर राम कोटी ने आत्महत्या कर ली. उसकी मौत के केवल 20 दिन बाद ही उसकी प्रेमिका ने भी आत्महत्या कर ली. जिससे पूरा परिवार बिखर गया. 

क्या है पूरी कहानी?

बेटे की मौत के बाद पूरे परिवार में दुख का माहौल था. हालांकि लड़के की मां सुक्कम्मा बताती हैं कि एक दिन उनके बेटे ने उन्हें सपने में आकर कहा कि मंदिर बनाओ और हमारी शादी करवाओ. जिसके बाद दंपति ने घर के अंदर ही एक छोटा मंदिर बनवाया. उन्होंने राम कोटी और उस लड़की की मूर्तियां बनवाईं और उन्हें साथ रखा. तब से हर साल राम नवमी पर इन मूर्तियों का शादी होता है. समारोह पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है.

प्रार्थनाएं होती हैं, चढ़ावा चढ़ाया जाता है और शादी की सभी रस्में पूरी की जाती हैं. इस दौरान राम कोटी और लड़की को भगवान राम और माता सीता के रूप में देखा जाता है. श्री राम नवमी का त्योहार भगवान राम-सीता के विवाह से जुड़ा माना जाता है. इसी परंपरा से प्रेरित होकर यह दंपति हर साल यह रस्म निभाता है. शुरू में यह सिर्फ परिवार का निजी कार्यक्रम था. लेकिन धीरे-धीरे पूरे गांव ने इसे अपना लिया. 

जश्न में पूरा गांव होता है शामिल

लालू और सुक्कम्मा के लिए यह रस्म सिर्फ पूजा नहीं है. यह उनके बेटे के अधूरे सपने को पूरा करने का तरीका है. सुक्कम्मा कहती हैं कि हमारे बेटे की शादी इस दुनिया में नहीं हो सकी, लेकिन हम हर साल उसे खुश रखते हैं. दोनों का मानना है कि इस रस्म से उनका बेटा और उसकी प्रेमिका शांति पाते हैं. गांव वाले भी इस भावना का सम्मान करते हैं. 22 साल से चल रही यह परंपरा अब महबूबाबाद की पहचान बन गई है. हर राम नवमी पर गांव में खुशी और श्रद्धा का माहौल छा जाता है.