उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम में लंबे वीकेंड के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. कई किलोमीटर तक वाहनों की कतारें लगी रहीं और पहाड़ी सड़क पर यातायात बेहद धीमा हो गया. कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ मुक्तेश्वर की ओर जाने वाले स्थानीय लोगों और पर्यटकों को भी जाम का सामना करना पड़ा.
वीकेंड के दौरान भीमताल, भवाली और कैंची के आसपास की सड़कों के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, जिनमें कारों, बसों और दोपहिया वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दीं. सामान्य तौर पर कुछ घंटों में पूरी होने वाली यात्राओं में इस बार काफी अधिक समय लगा. कई श्रद्धालु वाहनों से उतरकर सड़क के किनारे पैदल चलते भी नजर आए.
#WATCH | Nainital, Uttarakhand: A rush of tourists and devotees witnessed on the route to Baba Neem Karoli’s Kainchi Dham over the extended three-day long weekend. https://t.co/grYnLs1pQJ
— ANI (@ANI) October 3, 2026
बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए नैनीताल जिला प्रशासन कैंची क्षेत्र में एक वैकल्पिक मार्ग खोलने की संभावना पर विचार कर रहा है. जिलाधिकारी ललित मोहन के मुताबिक, अल्मोड़ा और रानीखेत की ओर जाने वाले मौजूदा बाईपास को ट्रैफिक डायवर्ट करने के लिए इस्तेमाल करने संबंधी नई मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP पर विचार किया जा रहा है.
प्रशासन मंगलवार को मंदिर प्रबंधन, पुलिस और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर भीड़ और यातायात नियंत्रण के उपायों को अंतिम रूप देगा.
जिलाधिकारी ललित मोहन ने बताया कि सामान्य दिनों में कैंची धाम में रोजाना करीब 25 हजार लोगों के आने की उम्मीद रहती है. लेकिन 2 अक्टूबर से शुरू हुए लंबे वीकेंड के दौरान रोजाना 35 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे. कैंची जाने वाली सड़क ही स्थानीय लोगों और मुक्तेश्वर की ओर जाने वाले वाहनों के लिए भी मुख्य मार्ग है, जिसके कारण यातायात दबाव कई गुना बढ़ गया. उन्होंने बताया कि रविवार को मुक्तेश्वर की ओर से आने वाले यातायात को भी नियंत्रित कर स्थिति को साफ किया गया.
प्रशासन के अनुसार भीड़ बढ़ने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं. पहला, मानसून खत्म होने के बाद पहाड़ों की यात्रा करने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ना और दूसरा, नीम करोली बाबा के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ की रिलीज.
फिल्म की सफलता के बाद नीम करोली बाबा और कैंची धाम को लेकर नई पीढ़ी में भी दिलचस्पी बढ़ी है. नीम करोली बाबा का 1973 में निधन हुआ था. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2026 के पहले छह महीनों में ही करीब 24.34 लाख लोग कैंची धाम पहुंच चुके हैं, जबकि पूरे पिछले साल लगभग आठ लाख लोगों ने यहां दर्शन किए थे.
‘हनुमान अंश’ के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने भी श्रद्धालुओं से कैंची धाम जाने से पहले वहां की स्थिति की जानकारी लेने की अपील की. उन्होंने कहा कि फिलहाल मंदिर में काफी भीड़ है और यात्रियों को ऐसी स्थिति से बचना चाहिए जिसमें परिवार की महिलाएं और बच्चे भीड़ या ट्रैफिक जाम में फंस जाएं.
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि कैंची धाम में भीड़ बहुत अधिक हो तो श्रद्धालु नीम करोली बाबा से जुड़े दूसरे स्थानों पर जाने पर विचार कर सकते हैं.
कैंची धाम क्षेत्र में यातायात समस्या को कम करने के लिए उत्तराखंड सरकार पहले से ही 18.15 किलोमीटर लंबे बाईपास पर काम कर रही है. यह बाईपास सैनिटोरियम से रानीघाट तक प्रस्तावित है. करीब आठ किलोमीटर हिस्से का काम पूरा कर उस पर हॉट मिक्स भी किया जा चुका है, जबकि बाकी 10.15 किलोमीटर क्षेत्र में पहाड़ी कटिंग का काम पूरा होने की जानकारी दी गई है.
बाईपास को भवाली-अल्मोड़ा हाईवे से जोड़ने के लिए एक मोटर पुल भी बनाया जा रहा है. इसके अलावा राज्य ने भवाली बाईपास और शिप्रा नदी पर 30 मीटर लंबा डबल लेन पुल भी तैयार किया है.
लोक निर्माण विभाग ने टल्ला रामगढ़-रातीघाट सड़क को भी एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में चिन्हित किया है. यह रास्ता कैंची को रामगढ़, मुक्तेश्वर, लोहाघाट और चंपावत से जोड़ सकता है. विभाग का मानना है कि सड़क को मजबूत करने से क्षेत्र में यातायात का दबाव काफी कम किया जा सकता है.
उत्तराखंड में बढ़ते पर्यटन को लेकर व्यापक स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है. राज्य के एक योजना दस्तावेज के अनुसार, यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या राज्य की निवासी आबादी के लगभग 300 प्रतिशत के बराबर है. इसकी तुलना में हिमाचल प्रदेश में यह अनुपात करीब 185 प्रतिशत बताया गया है.
दस्तावेज में यह चिंता भी जताई गई है कि जो पहाड़ी क्षेत्र कभी पैदल यात्रा और ट्रेकिंग के लिए पहचाने जाते थे, वे अब बड़ी संख्या में वाहनों के कारण दबाव में आ रहे हैं. हिमालयी तीर्थस्थलों की पर्यटक क्षमता और पर्यावरणीय सीमा को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण के सामने भी अध्ययन और चर्चा हो चुकी है.
कैंची धाम के लिए 2025 में पर्यटन विभाग ने कैरिंग कैपेसिटी यानी क्षेत्र की पर्यटक क्षमता से जुड़ा अध्ययन किया था. इसमें सामने आया कि करीब 64 प्रतिशत श्रद्धालु केवल दर्शन के लिए आते हैं और उसी दिन लौट जाते हैं. करीब 82.4 प्रतिशत श्रद्धालु उत्तराखंड के बाहर से आते हैं.
अध्ययन में यह भी सामने आया कि लगभग दो-तिहाई श्रद्धालुओं की उम्र 15 से 30 वर्ष के बीच थी. सबसे बड़ी बुनियादी समस्या पार्किंग को लेकर सामने आई, जहां 74 प्रतिशत लोगों ने उपलब्ध सुविधाओं से असंतोष जताया.
कैंची धाम मंदिर से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, भीड़ बढ़ने के बावजूद स्थिति को नियंत्रण में रखा गया. मंदिर के अकाउंट्स विभाग से जुड़े प्रदीप भट्ट ने बताया कि अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को मंदिर के अंदर और बाहर तैनात किया गया था. लंबे वीकेंड के कारण भीड़ बढ़ी थी, लेकिन पुलिस की अतिरिक्त व्यवस्था से स्थिति संभाली गई.
सोमवार तक स्थिति में काफी सुधार दिखाई दिया. मंदिर के प्रवेश द्वार के पास पारिवारिक कारोबार चलाने वाले 27 वर्षीय धीरज तिवारी ने बताया कि सबसे ज्यादा जाम एक-दो दिन रहा. उनके मुताबिक, सोमवार को प्रशासन ने यातायात साफ कर दिया और हालात सामान्य नजर आए.
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या केवल पर्यटकों की परेशानी तक सीमित नहीं है. भवाली निवासी मणि भारद्वाज के अनुसार, भारी भीड़ के दौरान काम पर जाने वाले लोगों, जरूरी सामान पहुंचाने वालों और चिकित्सा जरूरतों के लिए यात्रा करने वाले स्थानीय निवासियों को भी मुश्किल होती है.
उनका कहना है कि श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए अलग सड़क नहीं है और दोनों को एक ही बुनियादी ढांचे पर निर्भर रहना पड़ता है. इसलिए हर लंबे वीकेंड पर अतिरिक्त पुलिस लगाने के बजाय यातायात समस्या का स्थायी समाधान तलाशने की जरूरत है.