नई दिल्ली: राज्यसभा में बुधवार को छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा. कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित बल प्रयोग पर अब तक कोई जवाबदेही तय नहीं की गई है. इस मुद्दे पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए पुलिस कार्रवाई को उचित ठहराया. उन्होंने कहा कि जब कोई आंदोलन या सक्रिय राजनीति का रास्ता चुनता है, तो उसे पुलिस कार्रवाई का सामना करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए. नड्डा ने आपातकाल के दौरान छात्र कार्यकर्ता के रूप में अपने अनुभव का भी उल्लेख किया.
जेपी नड्डा ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करना उसका अधिकार है. उन्होंने बताया कि आपातकाल के समय छात्र आंदोलन में सक्रिय रहने के दौरान उन्हें भी दो बार कक्षा से उठाकर हिरासत में लिया गया था. उनका कहना था कि विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं.
मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र और आम नागरिक दोनों सुरक्षित नहीं हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. खड़गे ने सरकार से जवाबदेही तय करने और इस मामले में स्पष्ट जवाब देने की मांग की.
विपक्षी दल लगातार 20 जुलाई को छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठा रहे हैं. विपक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद में इस विषय पर बयान देने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी मांगने की मांग भी दोहराई. इस मुद्दे पर सदन के भीतर लगातार राजनीतिक टकराव बना हुआ है.
राज्यसभा में सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस छात्र नेता ऐशी घोष को गिरफ्तार करने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय में पहुंच गई थी. उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने 2021 के एक मामले का हवाला दिया. ब्रिटास ने इसे प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने का प्रयास बताते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगा.
यह मुद्दा लोकसभा में भी उठा, जहां विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर सरकार से जवाब मांगा. विपक्ष ने मांग की कि सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाने से पहले गृह मंत्री इस विषय पर बयान दें. इस दौरान सदन में हंगामे की स्थिति बनी रही. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई की तुलना आपातकाल से करते हुए सरकार की आलोचना की.