कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला खिलाड़ी अपने शानदार प्रदर्शन से देश का गौरव बढ़ा रही हैं. तिरंगे के साथ पोडियम पर खड़े होने का सपना पूरा करने के लिए इन खिलाड़ियों ने सालों तक कड़ी मेहनत, संघर्ष और चुनौतियों का सामना किया है. किसी की कहानी चोट से वापसी की है तो किसी की सफलता लगातार प्रयासों का परिणाम है.
अनुभवी चैंपियनों से लेकर नई प्रतिभाओं तक, भारतीय महिलाएं खेल के इस बड़े मंच पर अपनी क्षमता साबित कर रही हैं और देश को गर्व के कई मौके दे रही हैं. तो इसी कड़ी में आइए जानते हैं उन 10 भारतीय महिलाओं के बारे में जो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में देश को गौरवान्वित कर रही हैं.
इस सूची में सबसे पहला नाम मीराबाई चानू का जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पहला गोल्ड दिलाया.
मीराबाई चानू ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह भारत की सबसे बड़ी वेटलिफ्टर स्टार क्यों हैं. महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए, उन्होंने स्वर्ण पदक जीता और राष्ट्रमंडल खेलों 2026 में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया. उन्होंने 190 किलोग्राम के रिकॉर्ड तोड़ वेटलिफ्टिंग के साथ एक नया राष्ट्रमंडल खेलों का रिकॉर्ड भी बनाया.
सूची में दूसरा महिला शॉट पुट F57 में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली शर्मिला धनकर का है. उनके विनिंग थ्रो ने भारत को इस अभियान का दूसरा गोल्ड मेडल दिलाया और भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की. बता दें शर्मिला का यहां तक का सफर आसान नहीं रहा है. उनके परिवार ने उन्हें यहां तक पहुंचाने के लिए साल 2023 में हरियाणा के रेवाड़ी में अपना घर बेच दिया और फिलहाल वे किराए के मकान में रह रही हैं.
भारत की हरजिंदर कौर ने राष्ट्रमंडल खेलों 2026 में महिलाओं के 69 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता. उन्होंने कुल 227 किलोग्राम भार उठाया. यह प्रदर्शन बर्मिंघम 2022 खेलों में जीते गए ब्रॉन्च मेडल से कहीं बेहतर है.
वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने महिला 53 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता. उनका रजत पदक महिला वेटलिफ्टिंग में भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाता है, जहां एथलीटों की नई पीढ़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल कर रही है.
बिंद्यारानी देवी ने महिला 58 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग में कांस्य पदक जीता है. मणिपुर की इस वेटलिफ्टर ने भारत की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में से एक के रूप में अपनी पहचान बनाई है और उन्होंने एक बार फिर अहम मौके पर शानदार प्रदर्शन किया.
बिंद्यारानी के बाद अगला नाम शिल्पा के शायला का है, जिन्होंने पैरा एथलेटिक्स में भारत को जश्न मनाने का एक और कारण दिया. उन्होंने महिला शॉट पुट F57 में कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली में एक और पदक डाल दिया.
ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन मुक्केबाजी में भारत की सबसे मजबूत पदक दावेदारों में से एक हैं. हालांकि, राष्ट्रमंडल खेलों में उन्हें बिना कोई मुकाबला लड़े ही कम से कम कांस्य पदक मिलना तय है. महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग में केवल पांच मुक्केबाजों के पंजीकृत होने के कारण, 28 वर्षीय लवलीना को पहले दौर में बाई मिली और वह सीधे सेमीफाइनल में पहुंच गईं. लेकिन लवलीना सेमीफाइनल मुकाबले में उतरकर पदक का रंग स्वर्ण में बदलना चाहेंगी.
प्रिया घंघास भारत की उभरती हुई मुक्केबाजी सितारों में से एक हैं और राष्ट्रमंडल खेलों 2026 में महिला 60 किलोग्राम वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. हरियाणा की इस मुक्केबाज ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम में जगह बनाई है. स्कॉटलैंड की नियाम मिशेल को 4-1 से हराकर सेमीफाइनल में जगह पक्की करने के बाद प्रिया ने अपने और देश के लिए कांस्य पदक सुनिश्चित कर लिया है. अब उनकी नजर स्वर्ण पदक पर होगी.
एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता पारुल चौधरी 3000 मीटर स्टीपलचेज़ और 5000 मीटर स्पर्धाओं में भारत की ओर से नेतृत्व करेंगी. वह 5000 मीटर में राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक हैं और भारत की सबसे मजबूत लंबी दूरी की धाविकाओं में से एक हैं. एशियाई खेलों में इतिहास रचने और ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद, पारुल अपनी उपलब्धियों की बढ़ती सूची में राष्ट्रमंडल खेलों का पदक भी जोड़ना चाहेंगी.
भारत की प्रीति पवार ने महिलाओं के 54kg कैटेगरी के क्वार्टर फ़ाइनल में नॉर्दर्न आयरलैंड की निकोल क्लाइड को सर्वसम्मति से 5-0 के फैसले से हराया. प्रीति अब सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं और ग्लासगो में कम से कम ब्रॉन्ज मेडल पक्का कर लिया है.