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CJP आंदोलन के बाद नया विवाद! प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने और मारपीट के आरोपों से गरमाया मामला

CJP आंदोलन खत्म होने के बाद प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट और उत्पीड़न के वीडियो सामने आने से विवाद बढ़ गया है. आरोपों के बीच सोशल मीडिया गतिविधियों और कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.

KanhaiyaaZee
CJP आंदोलन के बाद नया विवाद! प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने और मारपीट के आरोपों से गरमाया मामला
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर लंबे समय तक चले CJP आंदोलन के समाप्त होने के बाद अब प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दिल्ली की सड़कों पर कुछ प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया गया, उनके साथ मारपीट और अपमानजनक व्यवहार किया गया. सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.

अभिजीत दीपके की अगुवाई वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब एक महीने से अधिक समय तक छात्र आंदोलन चला था. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त हो गया. इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ कथित हिंसा और दुर्व्यवहार के आरोप सामने आए, जिससे मामला फिर चर्चा में आ गया.

दिल्ली की सड़कों पर कथित हमलों के आरोप

एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों को दिल्ली में पहचान कर निशाना बनाया गया. कनॉट प्लेस इलाके से सामने आए कथित वीडियो में कुछ लोगों द्वारा प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट और धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं. इन वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और मामले की जांच की मांग की जा रही है.

वीडियो वायरल होने के बाद उठे सवाल

सामने आए कुछ वीडियो में कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को घेरने और उनसे जबरन माफी मंगवाने जैसे दृश्य दिखने का दावा किया गया है. एक अन्य वीडियो में एक व्यक्ति के साथ मारपीट का आरोप लगाया गया. इन घटनाओं को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए हैं कि विरोध प्रदर्शन के बाद किसी भी नागरिक के साथ हिंसा नहीं होनी चाहिए.

महिला प्रदर्शनकारियों को लेकर भी विवाद

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स से महिला प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें साझा की गईं और उन्हें पहचानने की अपील की गई. इसे लेकर निजता और ऑनलाइन उत्पीड़न को लेकर चिंता जताई गई. आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक मतभेद के कारण किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से निशाना बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.

कानून व्यवस्था और कार्रवाई पर बहस

पूरे मामले के बाद दिल्ली पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. कुछ लोगों ने कथित हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. वहीं, कुछ समर्थकों ने प्रदर्शनकारियों पर लगाए गए आरोपों का हवाला दिया है. फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और दावों को लेकर जांच तथा कानूनी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है.