जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार (19 अगस्त) की रात एक्स पर एक रहस्यमयी पोस्ट शेयर किया, जिसने उनके इरादों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म कर दिया. उनकी पोस्ट पर की गई टिप्पणियों में जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे की संभावित बहाली जैसे कयास लगाए गए. इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, न ही उमर अब्दुल्ला ने इस विषय पर कुछ कहा है.
सीएम उमर अब्दुल्ला के सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर शेयर किए एक पोस्ट में हैरी पॉटर के किरदार स्नेप का एक मीम और एक ‘झांकती आंख’ इमोजी शामिल था, लेकिन उन्होंने कोई साफ संदेश नहीं दिया. इस पोस्ट ने जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे की बहाली जैसे मुद्दों पर चर्चा को हवा दी, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) August 19, 2025
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
सीएम उमर अब्दुल्ला के पोस्ट के नीचे यूजर्स ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं. एक यूजर, पुलकित शर्मा ने तंज कसते हुए लिखा, “वही बात वे लोग कह रहे हैं जिन्होंने आपको चुना.” वहीं, आसिफ मकबूल नामक यूजर ने अटकल लगाई, “कल राज्य का दर्जा मिलेगा?” एक अन्य यूजर, अंकुर चौरसिया ने चुटकी लेते हुए कहा, “कोई राज्य का दर्जा नहीं. बैठिए और मेयरशिप का मजा लीजिए,” जो केंद्र शासित प्रदेश में मुख्यमंत्री की सीमित शक्तियों की ओर इशारा था. नदीम खान ने बीच का रास्ता सुझाया, “राज्य का दर्जा नहीं, लेकिन प्रशासनिक नियम.”
जबकि, एक अन्य यूजर, आर्यन सिंह ने लंबी प्रतिक्रिया दी, “लगभग सभी भारतीय, चाहे वे वामपंथी हों या दक्षिणपंथी, जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दोबारा मिलने के पक्ष में हैं. हम बस हिंसा और उग्रवाद का अंत चाहते हैं. आगे बढ़ें, कश्मीर कश्मीरियों के लिए होगा, चाहे वे मुस्लिम हों, सिख हों या हिंदू.
जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा
दरअसल, अगस्त 2019 में बीजेपी नीत एनडीए सरकार ने संसद के माध्यम से जम्मू-कश्मीर का विशेष संवैधानिक दर्जा और राज्य का दर्जा समाप्त कर इसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया, साथ ही लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया. सरकार ने भविष्य में राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था. वहीं, पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जीत हासिल की थी. सुप्रीम कोर्ट में भी इस मुद्दे पर सुनवाई हुई, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक राज्य की बहाली की समयसीमा स्पष्ट नहीं की है.