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बूंद-बूंद पानी को तरसेगा पड़ोसी, जानें क्यों भारत के एक कदम से बिलबिलाया पाकिस्तान?

India Stopped Flow of Water Towards Pakistan: राजनीतिक अस्थिरता और आतंकवाद के कारण पाकिस्तान पहले ही कंगाली से जूझ रहा है. ऐसे में भारत के एक कदम से अब बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने वाला है.

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बूंद-बूंद पानी को तरसेगा पड़ोसी, जानें क्यों भारत के एक कदम से बिलबिलाया पाकिस्तान?

India Stopped Flow of Water Towards Pakistan: भारत सरकार के एक कदम से पाकिस्तान अपने घुटनों पर आ गया है. भूखमरी के दौर से गुजर रहा भारत को पड़ोसी दुश्मन देख अब बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने वाला है. शाहपुर कंडी बैराज के पूरा होने के साथ भारत सरकार ने रावी नदी से पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी का प्रवाह पूरी तरह से रोक दिया गया है. ये शाहपुर कंडी बैराज पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर है. 

भारत के इस कदम का मतलब है कि जम्मू-कश्मीर क्षेत्र को अब उस 1,150 क्यूसेक पानी से फायदा होगा जो पहले पाकिस्तान जाता था. पानी का उपयोग सिंचाई समेत अन्य कई कार्यों में किया जाएगा. इससे कठुआ और सांबा जिलों में 32,000 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि को लाभ होगा. सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण शाहपुर कंडी बैराज परियोजना को पिछले तीन दशकों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.

20 वर्षों से अटका हुआ था ये काम

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाहपुर-कांडी बांध परियोजना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, क्योंकि इसमें जम्मू-कश्मीर में हजारों एकड़ कृषि भूमि को सिंचित करने की क्षमता है. 8 सितंबर 2018 को जम्मू-कश्मीर और पंजाब ने शाहपुर-कांडी बांध परियोजना पर काम फिर से शुरू करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, जो पिछले 40 वर्षों से लटका हुआ था.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि के तहत रावी, सतलुज और ब्यास नदियों के पानी पर भारत का विशेष अधिकार है, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों पर पाकिस्तान का नियंत्रण है. शाहपुर कंडी बैराज के पूरा होने से भारत को रावी नदी का ज्यादा इस्तेमाल करने की अनुमति मिलती है, जिससे सुनिश्चित होता है कि पुराने लखनपुर बांध से पहले पाकिस्तान की ओर बहने वाला पानी अब जम्मू और कश्मीर और पंजाब में इस्तेमाल किया जाएगा.

साल 1995 में पीवी नरसिम्हा राव ने रखी थी नींव

शाहपुर कंडी बैराज परियोजना की आधारशिला 1995 में पूर्व प्रधान मंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने रखी थी. हालांकि इस परियोजना को जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सरकारों के बीच कई विवादों का सामना करना पड़ा, जिसके कारण यह साढ़े चार साल से ज्यादा समय तक बंद रहा. 

भारत ने पहले ही कई जल भंडारण परियोजनाओं का निर्माण किया है, जिनमें सतलुज पर भाखड़ा बांध, ब्यास पर पोंग व पंडोह बांध और रावी पर थेन (रंजीतसागर) शामिल हैं. ब्यास-सतलज लिंक और इंदिरा गांधी नहर परियोजना जैसी अन्य परियोजनाओं के साथ इन परियोजनाओं ने भारत को पूर्वी नदियों के पानी के करीब पूरे हिस्से (95%) का उपयोग करने की इजाजत दी है.

जम्मू-कश्मीर और पंजाब को होगा बेइंतहा फायदा

हालांकि रावी नदी का करीब 2 मिलियन एकड़ फीट पानी अभी भी माधोपुर के नीचे पाकिस्तान में बिना इस्तेमाल के बह रहा है. शाहपुर कंडी बैराज के पूरा होने के साथ भारत अब अपने फायदे के लिए रावी नदी से जल संसाधनों का इस्तेमाल कर सकता है, जिससे जम्मू-कश्मीर और पंजाब में कृषि और आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा.