नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और इजरायल-ईरान संघर्ष ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हड़कंप मचा दिया है. भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि हमारे कई महत्वपूर्ण व्यापारिक जहाज युद्ध क्षेत्र में फंसे हुए हैं. इसी संकट के बीच मुंबई स्थित डायरेक्टरेट ऑफ शिपिंग ने बताया है कि उन्होंने 22 ऐसे जहाजों की पहचान कर ली है, जिन्हें रास्ता साफ होते ही सबसे पहले निकाला जाएगा. सरकार कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर सक्रिय है.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत अपने 30 व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए ईरान सरकार के साथ गहन बातचीत कर रहा है. वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में कुल 28 जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें से 24 जहाज होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में हैं, जबकि 4 जहाज होर्मुज और ओमान की खाड़ी के पास फंसे हैं. भारत इन जहाजों और उन पर तैनात नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कूटनीतिक प्रयास कर रहा है.
इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट बंद किए जाने से कई देशों में ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है. रिपोर्ट्स के अनुसार भारत सरकार इस क्षेत्र में 'नेवल एस्कॉर्ट' जैसे सुरक्षा उपाय लागू करने की योजना बना रही है. नौसेना के संरक्षण में जहाजों को सुरक्षित भारत लाने की तैयारी की जा रही है, ताकि समुद्र में किसी भी संभावित हमले से इन मूल्यवान जहाजों और चालक दल को बचाया जा सके.
पहचान किए गए 22 जहाजों में से 13 जहाज भारतीय ध्वज वाले हैं. इन जहाजों पर लदा कार्गो भारत के लिए संजीवनी जैसा है. इनमें 3 जहाजों पर एलएनजी, 11 पर एलपीजी और 8 पर कच्चा तेल लदा हुआ है. अनुमान है कि इनमें लगभग 2,15,000 मीट्रिक टन एलएनजी, 4,15,000 मीट्रिक टन एलपीजी और 17,50,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल है. यह खेप भारत पहुंचते ही घरेलू गैस और ईंधन संकट से बड़ी राहत दिलाएगी.
कार्गो के साथ-साथ सरकार नाविकों की जान बचाने पर भी विशेष ध्यान दे रही है. 12 मार्च तक युद्ध क्षेत्र में फंसे 215 नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है. इसके अलावा तीन अन्य भारतीय कंटेनर जहाजों की भी पहचान की गई है, जिन्हें सुरक्षित रूप से होर्मुज से बाहर निकालने की कवायद जारी है. सरकार का लक्ष्य है कि युद्ध की आग में फंसे एक भी भारतीय नागरिक को कोई नुकसान न पहुंचे.