भारत में डेंगू की रोकथाम को लेकर बड़ी प्रगति हुई है. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने जापानी कंपनी टाकेडा की QDENGA वैक्सीन को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही यह देश की पहली स्वीकृत डेंगू वैक्सीन बन गई है. ऐसे समय में यह फैसला आया है जब देश में हर साल बड़ी संख्या में डेंगू के मामले सामने आते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैक्सीन संक्रमण के खतरे और गंभीर बीमारी के मामलों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
QDENGA एक जीवित क्षीणित टेट्रावेलेंट वैक्सीन है. इसे डेंगू वायरस के चारों प्रकारों से सुरक्षा देने के लिए तैयार किया गया है. यह दो खुराक में दी जाती है और दोनों खुराक के बीच तीन महीने का अंतर रखा जाता है. इसे इंजेक्शन के रूप में लगाया जाता है. इसकी खास बात यह है कि टीका लगवाने से पहले पुराने संक्रमण की जांच जरूरी नहीं होती.
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डेंगू का बोझ सबसे ज्यादा है. मानसून और उसके बाद हर साल बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंचते हैं. अब तक रोकथाम के लिए मच्छर नियंत्रण, साफ सफाई, जल्दी जांच और उपचार पर जोर दिया जाता था. वैक्सीन की मंजूरी से बचाव की रणनीति को एक मजबूत आधार मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस वैक्सीन का उपयोग बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए किया जा रहा है. इसे पहले डेंगू हो चुका है या नहीं, इस आधार पर अलग नहीं किया जाता. भारत में इसके उपयोग से जुड़ी अंतिम पात्रता और दिशा निर्देश लॉन्च के समय जारी किए जाएंगे. इससे बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाना आसान हो सकता है.
क्लिनिकल परीक्षणों में QDENGA ने डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को 84 प्रतिशत तक घटाने और पुष्टि किए गए संक्रमण से लगभग 61 प्रतिशत तक सुरक्षा देने के परिणाम दिखाए हैं. भारत में इसकी कीमत अभी घोषित नहीं हुई है. स्थानीय उत्पादन के लिए टाकेडा और बायोलॉजिकल ई की साझेदारी भविष्य में लागत कम करने और उपलब्धता बढ़ाने में मदद कर सकती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल वैक्सीन से डेंगू पूरी तरह समाप्त नहीं होगा. मच्छरों की रोकथाम, साफ वातावरण, समय पर जांच और जागरूकता पहले की तरह जरूरी रहेंगे. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी टीकाकरण को व्यापक डेंगू नियंत्रण रणनीति का एक हिस्सा मानता है. इसलिए मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना आगे भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा.