'वंदे मातरम' और 'जन गण मन' में क्या है अंतर?


Shanu Sharma
20 Jul 2026

मानसून सत्र

    आज यानी 20 जुलाई से मानसून सत्र शुरू हो चुका है. इस बार सरकार सदन में कई बिल पेश करने की तैयारी मे हैं.

राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक

    सरकार द्वारा पेश किए जा रहे बिलों में राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी शामिल हैं.

कानूनी सुरक्षा देने का प्रस्ताव

    इसकी मदद से सरकार 'वंदे मातरम' को भी वही कानूनी सुरक्षा देने का प्रस्ताव है जो अभी राष्ट्रगान 'जन गण मन' को मिली हुई है.

अपमान बनेगा अपराध

    अगर यह विधेयक पास होता है तो इसे गाए जाने के दौरान जान-बूझकर किया गया कोई भी अपमान, बाधा या व्यवधान को एक आपराधिक अपराध माना जाएगा.

राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में क्या अंतर

    लेकिन क्या आपको पता है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में क्या अंतर है और इन सरकार इसे क्यों कानूनी सुरक्षा देने की कोशिश कर रही है?

बराबर का सम्मान

    संविधान सभा ने 'जन गण मन' को राष्ट्रगान के तौर पर अपनाया था. सभा ने यह भी माना कि 'वंदे मातरम' ने 'भारत की आजादी की लड़ाई में ऐतिहासिक भूमिका निभाई' थी और इसे भी बराबर सम्मान मिलना चाहिए.

खास मौकों पर बजाना जरूरी

    'बराबर सम्मान' का मतलब कभी भी 'बराबर कानूनी दर्जा' नहीं रहा है. राष्ट्रगान को खास मौकों पर बजाना जरूरी है लेकिन 'वंदे मातरम' के लिए खास मौकों पर ऐसा कोई कानूनी नियम नहीं है.

गृह मंत्रालय के निर्देश

    हालांकि गृह मंत्रालय के निर्देश पर जिन कार्यक्रमों में दोनों गीत गाए जाते हैं, वहां 'जन गण मन' से पहले 'वंदे मातरम' बजाया जाना चाहिए. लेकिन इस गीत पर फिर से विवाद शुरू हो गया.

हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र

    विवाद नई नहीं है, आजादी की लड़ाई के दौरान, मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों ने इस गीत के बाद के छंदों पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि उनमें हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र है.

शुरुआती दो छंद

    इसके बाद, गांधी और नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने 'वंदे मातरम' के केवल शुरुआती दो छंदों को ही राष्ट्रगीत के तौर पर इस्तेमाल करने पर सहमति जताई.

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