menu-icon
India Daily

दीवारों पर देवी-देवता, सड़क पर बवाल! अदीना मस्जिद को लेकर क्यों मचा हंगामा?

पश्चिम बंगाल के मालदा स्थित अदीना मस्जिद को लेकर मंदिर और मस्जिद का विवाद फिर तेज हो गया है. हिंदू संगठन इसे प्राचीन आदिनाथ मंदिर बताते हुए शिवलिंग स्थापना की मांग कर रहे हैं, जबकि एएसआई के रिकॉर्ड में यह संरक्षित मस्जिद है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
दीवारों पर देवी-देवता, सड़क पर बवाल! अदीना मस्जिद को लेकर क्यों मचा हंगामा?
Courtesy: @sarkar28922 X Account

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित अदीना मस्जिद एक बार फिर धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद के केंद्र में आ गई है. सावन माह की शुरुआत के साथ कुछ हिंदू संगठनों ने मस्जिद के पास भगवान आदिनाथ के प्रतीक स्वरूप शिवलिंग स्थापित करने और रुद्राभिषेक करने की घोषणा की, जिसके बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया. प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और पूरे क्षेत्र की निगरानी ड्रोन के जरिए की जा रही है.

हिंदू संगठनों का दावा है कि वर्तमान अदीना मस्जिद का निर्माण एक प्राचीन आदिनाथ मंदिर को ध्वस्त कर किया गया था. उनका कहना है कि मस्जिद की दीवारों और संरचना में हिंदू देवी देवताओं की आकृतियां और स्थापत्य शैली दिखाई देती है, जो उनके दावे को मजबूत करती है. इसी आधार पर वे इस स्थल को आदिनाथ मंदिर घोषित करने और पूजा की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं.

भाजपा के राज्यसभा सांसद ने क्या कहा?

इस मुद्दे को राजनीतिक स्तर पर भी उठाया गया है. भाजपा के राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने संसद में दावा किया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अभिलेख और संरचना के अवशेष इस स्थान के मंदिर होने की ओर संकेत करते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग कानून के दायरे में रहकर सरकारी मान्यता प्राप्त करने की है.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के रिकॉर्ड में क्या है?

दूसरी ओर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के रिकॉर्ड में यह स्थल अदीना मस्जिद के नाम से संरक्षित स्मारक के रूप में दर्ज है. एएसआई के नियमों के अनुसार संरक्षित स्मारकों के भीतर नई धार्मिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती. इस पूरे मामले को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका लंबित है और अदालत ने एएसआई से पुरातात्विक रिपोर्ट मांगी है. अभी तक किसी भी दावे पर अदालत की ओर से अंतिम फैसला नहीं आया है.

कब हुआ था इसका निर्माण?

इतिहास के अनुसार अदीना मस्जिद का निर्माण 14वीं सदी में बंगाल सल्तनत के सुल्तान सिकंदर शाह ने कराया था. इसे कभी भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे बड़ी मस्जिदों में गिना जाता था. बाद में भूकंप से यह क्षतिग्रस्त हो गई और नियमित उपयोग बंद हो गया. वहीं कुछ इतिहासकारों और हिंदू संगठनों का मानना है कि इसके निर्माण में पहले से मौजूद किसी हिंदू या अन्य धार्मिक संरचना के अवशेषों का उपयोग किया गया था. हालांकि इस दावे पर इतिहासकारों में एकमत राय नहीं है.

स्थानीय मुस्लिम समुदाय का कहना है कि इस संवेदनशील विवाद का समाधान केवल अदालत और कानून के माध्यम से होना चाहिए. प्रशासन ने भी लोगों से अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की है. फिलहाल यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और अदीना मस्जिद को लेकर किए जा रहे दावों पर कोई अंतिम कानूनी निर्णय नहीं आया है. इसलिए इस विषय से जुड़े सभी दावों को अदालत और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष आने तक अप्रमाणित माना जाएगा.