नई दिल्ली: भारत सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत नए मसौदा नियमों का प्रस्ताव रखा गया है. इन नियमों का उद्देश्य डिलिवरी बॉय, कैब ड्राइवर और अन्य प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सुरक्षा देना है. सरकार चाहती है कि जोमैटो, स्विगी, ओला और उबर जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े श्रमिकों को बीमा और पेंशन का लाभ मिले. ये नियम 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं.
मसौदे के अनुसार लाभ पाने के लिए न्यूनतम काम की अवधि तय की गई है. यदि कोई श्रमिक केवल एक ही प्लेटफॉर्म पर काम करता है तो उसे एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिन काम करना होगा. यदि कोई श्रमिक एक से अधिक प्लेटफॉर्म पर काम करता है तो कुल काम के दिन 120 होने जरूरी हैं. काम की गिनती उस दिन से होगी जब श्रमिक पहली बार कमाई करता है. एक ही दिन में अलग अलग प्लेटफॉर्म पर काम करने पर हर प्लेटफॉर्म को अलग दिन माना जाएगा.
सरकार ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने पर जोर दिया है. 16 साल से अधिक उम्र के सभी गिग श्रमिक पंजीकरण के पात्र होंगे. लाभ लेने की अधिकतम उम्र 60 साल तय की गई है. ई श्रम पोर्टल के जरिए आधार से जुड़ा पंजीकरण जरूरी होगा. हर पंजीकृत श्रमिक को यूनिवर्सल अकाउंट नंबर और डिजिटल पहचान पत्र मिलेगा. इससे प्लेटफॉर्म बदलने पर भी श्रमिक के लाभ सुरक्षित रहेंगे.
स्वास्थ्य सुविधा के लिए आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने का प्रस्ताव है. जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा की सुविधा भी मिलेगी. भविष्य में पेंशन योजना लाई जाएगी जिसमें श्रमिक और प्लेटफॉर्म दोनों का योगदान होगा. मातृत्व लाभ और बच्चों के लिए क्रेच सुविधा भी शामिल की गई है. मसौदे में राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड बनाने का प्रावधान है.
इस बोर्ड में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी शामिल होंगे. श्रमिक संघों और एग्रीगेटर संघों के प्रतिनिधियों को भी जगह दी जाएगी.
बोर्ड का काम नीतियों की निगरानी और नए एग्रीगेटर्स की पहचान करना होगा. यदि कोई श्रमिक तय दिनों तक काम पूरा नहीं करता है तो वह लाभ से वंचित रहेगा. 60 वर्ष की आयु के बाद सामाजिक सुरक्षा लाभ समाप्त हो जाएंगे. फिलहाल इन नियमों पर जनता से राय मांगी जा रही है. मार्च 2026 तक अंतिम अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है.