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एंटीबायोटिक से बेअसर हो रहे इंफेक्शन, महंगा हो रहा इलाज, पीएम मोदी ने बढ़ते खतरे को लेकर किया अलर्ट

पीएम मोदी ने बताया कि बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेना, बीच में ही दवा छोड़ देना या हर छोटी बीमारी में एंटीबायोटिक लेना इस खतरे को बढ़ा रहा है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
एंटीबायोटिक से बेअसर हो रहे इंफेक्शन, महंगा हो रहा इलाज, पीएम मोदी ने बढ़ते खतरे को लेकर किया अलर्ट
Courtesy: pinterest

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में तेजी से बढ़ रही एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को लेकर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि जो दवाएं पहले आम बीमारियों में असर दिखाती थीं, अब वही दवाएं कई मामलों में काम नहीं कर रही हैं. निमोनिया और यूटीआई जैसी आम बीमारियों के इलाज में भी एंटीबायोटिक दवाएं धीरे-धीरे बेअसर होती जा रही हैं.

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस क्या है

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का मतलब है कि बैक्टीरिया दवाओं के खिलाफ खुद को मजबूत बना लेते हैं. जब दवा असर नहीं करती, तो इंफेक्शन ठीक होने में ज्यादा समय लगता है. कई बार बीमारी गंभीर रूप भी ले लेती है. यह स्थिति तब पैदा होती है जब एंटीबायोटिक दवाओं का जरूरत से ज्यादा या गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है.

गलत इस्तेमाल बन रहा बड़ी वजह

पीएम मोदी ने बताया कि बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेना, बीच में ही दवा छोड़ देना या हर छोटी बीमारी में एंटीबायोटिक लेना इस खतरे को बढ़ा रहा है. इससे बैक्टीरिया “स्मार्ट” हो जाते हैं और दवाओं पर असर कम होने लगता है.

क्यों है यह चिंता की बात

हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत में बैक्टीरियल इंफेक्शन के कई मामले अब सामान्य इलाज से ठीक नहीं हो रहे हैं. बताया जा रहा है कि हर तीन में से एक बैक्टीरियल इंफेक्शन स्टैंडर्ड इलाज के खिलाफ रेजिस्टेंस दिखा रहा है. इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है. अस्पताल में ज्यादा दिन रुकना पड़ता है, इलाज महंगा हो जाता है और जान का खतरा भी बढ़ जाता है.

स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ता दबाव

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की वजह से डॉक्टरों को ज्यादा ताकतवर दवाएं देनी पड़ती हैं, जो महंगी भी होती हैं और उनके साइड इफेक्ट भी ज्यादा हो सकते हैं. इससे देश की हेल्थ सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.

सरकार का एक्शन प्लान

इस खतरे से निपटने के लिए भारत सरकार नया नेशनल एक्शन प्लान लागू कर रही है. इसके तहत एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर नजर रखी जाएगी, लोगों को जागरूक किया जाएगा और डॉक्टरों को दवाएं सोच-समझकर लिखने के लिए प्रेरित किया जाएगा.

आम लोगों की भूमिका अहम

सरकार का मानना है कि अगर समय रहते एंटीबायोटिक के सही इस्तेमाल पर ध्यान दिया गया, तो इस बढ़ते खतरे को रोका जा सकता है और आम बीमारियों का इलाज फिर से आसान बनाया जा सकेगा.