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संपत्ति में बेटियों को समान अधिकार, UCC में भेदभाव समाप्त करने की सिफारिश

देश में फिलहाल अलग-अलग धर्म के लिए अलग-अलग प्रावधान है. उत्तराखंड यूसीसी ड्राफ्ट को बनाने वाली कमेटी ने बेटियों के लिए समान अधिकार की सिफारिश की है.

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Gyanendra Sharma
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Uttarakhand UCC: उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट बैठक में यूनिफॉर्म सिविल कोड को मंजूरी दे दी गई. यूसीसी ड्राफ्ट को बनाने वाली कमेटी ने इसमें बेटियों के लिए समान अधिकार की सिफारिश की है. कमेटी ने संपत्ति के अधिकार में सभी संतानों को बराबरी का हक देने की सिफारिश की है. सूत्रों के अनुसार सभी वर्गो के लिए पुत्र और पुत्री को संपत्ति में सामन अधिकार देने की मांग रखी है. 

देश में फिलहाल अलग-अलग धर्म के लिए अलग-अलग प्रावधान है. इसी तरह संपत्ति में अधिकार के लिए जायज और नाजायज संतान का भी भेद खत्म कर दिया गया है. एक अहम कदम के तहत नाजायज बच्चों को भी उस दंपति की जैविक संतान ही माना गया है. इस कारण पंजीकृत विवाह से बाहर पैदा होने वाले ऐसे बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा. समान नागरिक संहिता में गोद लिए गए, सरोगेसी के द्वारा जन्म लेने वाले और असिस्टेड रीप्रोडक्टि व टेक्नोलॉजी के द्वारा जन्म लिए गए बच्चों में कोई भेद नहीं माना गया है. यानि सभी तरह से पैदा बच्चों को जैविक संतान मानते हुए, समान अधिकार दिए गए हैं. 

उत्तराखंड़  के सीएम धामी समेत सभी कैबिनेट मंत्रियों द्वारा चर्चा के बाद ड्राफ्ट को मंजूर कर लिया गया. कल यानी 5 फरवरी (सोमवार) से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में अब UCC पर चर्चा होगी और इसे सदन में पेश किया जाएगा.

UCC ड्राफ्ट की मुख्य बातें

. लड़कियों की शादी की उम्र 18 वर्ष और लड़कों की शादी की उम्र 21 वर्ष होगी 
. विवाह का रजिस्ट्रेशन सभी के लिए अनिवार्य. 
. पति-पत्नी दोनों को तलाक के लिए समान वजह और आधार होंगे. यानी तलाक का जो नियम पति के लिए लागू होगा वहीं पत्नी    के लिए भी लागू होगा. 
. एक पत्नी या पति के जीवित रहते दूसरे से शादी नहीं हो सकेगी, इससे बहुविवाह पर रोक लगेगी.
. संपत्ति के उत्तराधिकार में लड़के-लड़कियों को बराबर अधिकार मिलेगा.
. लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों के लिए डिक्लेरेशन आवश्यक होगा. 
. यह कानून अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं होगा. 
 

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First Published : 04 February 2024, 11:25 PM IST