संसद में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 पेट्रोल को लागू करने से पहले उसकी सुरक्षा और प्रदर्शन की पूरी वैज्ञानिक जांच कराई गई थी. सरकार के अनुसार विभिन्न संस्थानों, ऑटोमोबाइल कंपनियों और विशेषज्ञ एजेंसियों द्वारा किए गए परीक्षणों में यह ईंधन निर्धारित परिस्थितियों में सुरक्षित और भरोसेमंद पाया गया.
भारी उद्योग मंत्रालय ने संसद को लिखित जवाब में बताया कि E20 ईंधन पर ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) और वाहन निर्माताओं ने विस्तृत परीक्षण किए. इन जांचों में इंजन की मजबूती, ड्राइविंग प्रदर्शन, ठंडे मौसम में स्टार्ट होने की क्षमता, ईंधन प्रणाली की विश्वसनीयता, जंग से सुरक्षा, सामग्री की अनुकूलता, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया गया. मंत्रालय ने कहा कि सभी परिणाम संतोषजनक रहे और किसी बड़े जोखिम के संकेत नहीं मिले.
सरकार ने बताया कि 26 दिसंबर 2020 को नीति आयोग के तहत गठित अंतर-मंत्रालयी समिति ने एथेनॉल मिश्रित ईंधन से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं का विस्तार से अध्ययन किया था. इस प्रक्रिया में वाहन निर्माता कंपनियों, ऑटो पार्ट्स आपूर्तिकर्ताओं, परीक्षण एजेंसियों, तेल विपणन कंपनियों और उद्योग संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही. समिति ने वाहन अनुकूलता, माइलेज और प्रदर्शन से जुड़े निष्कर्षों के आधार पर E20 ईंधन को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की सिफारिश की.
मंत्रालय के अनुसार परीक्षणों में पुराने यानी लेगेसी वाहनों को भी शामिल किया गया. निर्धारित संचालन परिस्थितियों में इन वाहनों के इंजन, प्रदर्शन, टिकाऊपन या सामग्री पर कोई महत्वपूर्ण नकारात्मक प्रभाव दर्ज नहीं हुआ. सरकार ने कहा कि E20 को लागू करने से पहले सभी आवश्यक वैज्ञानिक मानकों का पालन किया गया और इसके बाद ही इसे बाजार में उतारा गया, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित ईंधन उपलब्ध कराया जा सके.
सरकार का कहना है कि E20 ईंधन केवल व्यापक वैज्ञानिक पुष्टि के बाद ही लागू किया गया है. इसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना भी है. केंद्र का मानना है कि यह पहल देश को स्वच्छ ईंधन, कम आयात निर्भरता और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.