पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच हुए नए त्रिपक्षीय रक्षा समझौते ने क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है. इस समझौते के बाद भारत ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है और भारत इससे जुड़े सभी पहलुओं पर बारीकी से नजर रख रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार समय-समय पर आवश्यक जानकारी साझा करती रहेगी.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस त्रिपक्षीय समझौते की नींव तीनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों, साझा रणनीतिक हितों और लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग पर आधारित है. संयुक्त बयान में कहा गया है कि यदि तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. समझौते का उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना और क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता को बढ़ावा देना बताया गया है.
तुर्किए के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह समझौता पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है और इसका उद्देश्य किसी विशेष देश को निशाना बनाना नहीं है. उन्होंने कहा कि भविष्य में क्षेत्र के अन्य देशों के लिए भी इसमें शामिल होने की संभावना खुली रह सकती है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यह नई व्यवस्था मौजूदा द्विपक्षीय या बहुपक्षीय सुरक्षा समझौतों का विकल्प नहीं होगी, बल्कि उनके पूरक के रूप में कार्य करेगी.
सऊदी अरब स्थित गल्फ रिसर्च सेंटर के चेयरमैन अब्दुलअजीज सागर ने इस समझौते को राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया. उनके अनुसार, मुस्लिम दुनिया के तीन प्रभावशाली देशों का ऐसे समय में एक साथ आना, जब वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है, सुरक्षा सहयोग को नई दिशा दे सकता है. उनका मानना है कि यदि इस ढांचे को संस्थागत रूप दिया गया, तो यह तीनों देशों की सामूहिक कूटनीतिक और रक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा.
इस साझेदारी में शामिल तीनों देशों की अपनी-अपनी विशिष्ट सामरिक क्षमता है. तुर्किए के पास नाटो की दूसरी सबसे बड़ी सेना है, जबकि सऊदी अरब ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक प्रभाव रखने के साथ इस्लाम के पवित्र स्थलों का संरक्षक भी है. वहीं पाकिस्तान एकमात्र मुस्लिम-बहुल परमाणु शक्ति है. ऐसे में इन तीनों देशों का एक साझा रक्षा ढांचे में आना क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर असर डाल सकता है. भारत ने फिलहाल संयमित प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि वह इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है.