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India Daily

'हमारा जंतर-मंतर नहीं छीन सकते'... दिल्ली HC की टिप्पणी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध, सौरव दास का बड़ा बयान

दिल्ली हाईकोर्ट की जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर टिप्पणी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने विरोध जताया और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'हमारा जंतर-मंतर नहीं छीन सकते'... दिल्ली HC की टिप्पणी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध, सौरव दास का बड़ा बयान
Courtesy: X

दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के प्रमुख स्थल जंतर-मंतर को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन करते हुए कहा कि यह नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'Hands Off Our Jantar Mantar' और आरोप लगाया कि यदि प्रदर्शनकारियों से यह स्थान भी छीन लिया गया, तो शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने के विकल्प सीमित हो जाएंगे.

 'इंडिया गेट के बाद अब जंतर-मंतर भी नहीं'

सौरव दास ने अपने बयान में कहा कि पहले सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन के लिए इंडिया गेट का उपयोग किया जाता था, लेकिन वहां प्रदर्शन की अनुमति समाप्त होने के बाद जंतर-मंतर लोकतांत्रिक आवाज उठाने का प्रमुख स्थान बन गया. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जंतर-मंतर पर भी रोक लगाई जाती है, तो नागरिक अपने मौलिक अधिकार का प्रयोग कहां करेंगे. उनका कहना था कि सरकार पहले वैकल्पिक स्थान तय करे, उसके बाद ही मौजूदा व्यवस्था में बदलाव पर विचार किया जाए.

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा?

यह विवाद उस समय सामने आया, जब दिल्ली हाईकोर्ट में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई हो रही थी. सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अमित महाजन ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि विरोध-प्रदर्शन से पूरे शहर को अनावश्यक रूप से प्रभावित नहीं होना चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि आखिर शहर को इस तरह की स्थिति का सामना क्यों करना पड़े. हालांकि, अदालत ने प्रदर्शन की अनुमति देने या न देने पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया और दिल्ली पुलिस को याचिकाकर्ता के आवेदन पर शनिवार तक निर्णय लेने का निर्देश दिया.

सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है मामला

जंतर-मंतर को राजधानी का स्थायी प्रदर्शन स्थल बनाए रखने या इसके विकल्प तलाशने का मुद्दा फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है. शीर्ष अदालत एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के लिए वैकल्पिक स्थान निर्धारित करने की मांग की गई है. ऐसे में इस मुद्दे पर अंतिम कानूनी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हुई है.

लोकतांत्रिक अधिकार बनाम सार्वजनिक व्यवस्था

जंतर-मंतर को लेकर उठी बहस ने एक बार फिर लोकतांत्रिक अधिकारों और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन के प्रश्न को केंद्र में ला दिया है. एक ओर प्रदर्शनकारी इसे अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण विरोध का महत्वपूर्ण मंच मान रहे हैं, वहीं अदालत और प्रशासन का जोर इस बात पर है कि विरोध-प्रदर्शन से आम नागरिकों के दैनिक जीवन और यातायात पर अनावश्यक असर न पड़े. अब सभी की नजर दिल्ली पुलिस के फैसले और सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है.