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इमरजेंसी के समय ही पीएम मोदी ने ढूंढ लिया था 'आपदा में अवसर'? खुद ट्वीट करके बताया उस वक्त क्या कर रहे थे

आपातकाल के दौरान पीएम मोदी एक छात्र नेता के तौर पर सरकार के खिलाफ अवाज उठा रहे थे. 1974 में गुजरात में नवनिर्माण आंदोलन के दौरान, नरेंद्र मोदी ने देश में बदलाव लाने में छात्रों की आवाज की शक्ति को प्रत्यक्ष रूप से देखा. उन्हें अपने जोशीले भाषणों के माध्यम से युवा आंदोलन को आवाज देने के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में नियुक्त किया गया था. अब पीएम मोदी ने उस समय की अपनी तस्वीरें री-शेयर की हैं.

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इमरजेंसी के समय ही पीएम मोदी ने ढूंढ लिया था 'आपदा में अवसर'? खुद ट्वीट करके बताया उस वक्त क्या कर रहे थे
Courtesy: Social Media

आपतकाल की बरसी पर पीएम नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को जमकर घेरा. पीएम मोदी ने कहा कि आपातकाल लगाने वालों को संविधान के प्रति अपने प्रेम का इजहार करने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि आपातकाल के काले दिनों ने दिखाया कि कांग्रेस ने बुनियादी स्वतंत्रताओं को नष्ट किया और संविधान को रौंद दिया. 25 जून 1975 में भारत में लगी इमरजेंसी 21 मार्च 1977 यानी कि पूरे 21 महीने चली थी. उस आपातकाल के आज 49 साल पूरे हो गए हैं.

पीएम मोदी ने इमरजेंसी के दौरान पुलिस से बचने के लिए कई रूप बदले थे. मोदी आर्काइव नाम के एक्स अकाउंट से उस दौरान के कई फोटो और दस्तावेज शेयर किए गए हैं. इस पर पीएम मोदी ने भी अपना रिएक्शन दिया है. पीएम ने लिखा, 'बहुत ही चुनौतीपूर्ण समय था. उन दिनों सभी क्षेत्रों के लोग एक साथ आए और लोकतंत्र पर इस हमले का विरोध किया.'

मोदी आर्काइव सोशल मीडिया एक्स अकाउंट पर पीएम की तस्वीर शेयर की गई है. साथ ही, एक कविता की कॉपी है. कैप्शन में लिखा गया है कि अपने शब्दों में 'आपदा में अवसर', जिसने उन्हें राजनीतिक स्पेक्ट्रम में नेताओं और संगठनों के साथ काम करने का मौका दिया, जिससे उन्हें विभिन्न विचारधाराओं और दृष्टिकोणों से रूबरू होने का मौका मिला. 

विदेश में नरेंद्र मोदी के सहयोगियों ने 'सत्यवाणी' और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित अन्य समाचार पत्रों की फोटोकॉपी भेजीं, जिनमें आपातकाल के दिनों का विरोध करने वाले लेख थे. 

पहचान से बचने के लिए भेष बदले

पीएम मोदी  ने भी पहचान से बचने के लिए कई तरह के भेष अपनाए. उनके भेष इतने प्रभावी थे कि लंबे समय से परिचित लोग भी उन्हें पहचान नहीं पाए. उन्होंने भगवा वस्त्र पहने स्वामीजी और यहां तक ​​कि पगड़ी पहने सिख का वेश धारण किया. एक अवसर पर, उन्होंने जेल में अधिकारियों को धोखा देकर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज पहुंचाने में सफलता प्राप्त की.

जोशीले भाषणों से युवाओं को आंदोलित किया

हालांकि, आपातकाल की कहानी 25 जून, 1975 को शुरू नहीं हुई थी, जब इसे लगाया गया था. कांग्रेस पार्टी के भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्रों के नेतृत्व में आंदोलन पूरे देश में फैल रहा था और गुजरात कोई अपवाद नहीं था. 1974 में गुजरात में नवनिर्माण आंदोलन के दौरान नरेंद्र मोदी ने देश में बदलाव लाने में छात्रों की आवाज़ की शक्ति को प्रत्यक्ष रूप से देखा. आरएसएस के युवा प्रचारक के रूप में उन्हें अपने जोशीले भाषणों के माध्यम से युवा आंदोलन को आवाज देने के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में नियुक्त किया गया था.