लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को छात्र आंदोलन और कथित पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए तीन प्रमुख मांगें सामने रखीं. राहुल गांधी ने सबसे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई और कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. उनके मुताबिक, शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है.
राहुल गांधी ने कहा कि पहली मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है. दूसरी मांग यह है कि छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए. तीसरी मांग के रूप में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की अपील की. राहुल गांधी का कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, उसने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं और सरकार को इस पर संवेदनशील रुख अपनाना चाहिए.
Dharmendra Pradhan should be shown the door, he is incapable of holding the post: Rahul Gandhi pic.twitter.com/ivDVOagJRU
— Press Trust of India (@PTI_News) July 22, 2026
राहुल गांधी ने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 152 परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आईं, लेकिन अब तक किसी मामले में दोषियों को सजा नहीं मिली. उन्होंने आरोप लगाया कि इससे देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ा है. उनके अनुसार, लाखों छात्र वर्षों की मेहनत और मानसिक दबाव झेलने के बाद परीक्षा देते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनके भविष्य पर सवाल खड़े कर देती हैं. राहुल गांधी ने कहा कि दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से छात्रों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है.
राहुल गांधी ने कहा कि छात्र केवल निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जिसे किसी भी लोकतंत्र में अनदेखा नहीं किया जा सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि कथित पेपर लीक की लगातार घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया है. राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों का शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वास बहाल करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, ताकि भविष्य में छात्रों को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े.