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India Daily

मुश्किल में रॉबर्ट वाड्रा, शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की अदालत ने किया तलब

रॉबर्ट वाड्रा ने हमेशा से ही इन सभी आरोपों से इनकार किया है. उनका कहना है कि यह सब उनके और उनके परिवार के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
मुश्किल में रॉबर्ट वाड्रा, शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की अदालत ने किया तलब
Courtesy: @akshay_vicky

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने बुधवार को कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए उन्हें 16 मई को अदालत में पेश होने का आदेश दिया. विशेष न्यायाधीश सुशांत चंगोत्रा ने यह समन जारी किया है. यह मामला हरियाणा के शिकोहपुर में एक विवादास्पद भूमि सौदे से जुड़ा है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग की जांच चल रही है. ईडी ने पिछले साल जुलाई में यह आरोपपत्र दायर किया था. गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में ईडी ने वाड्रा से तीन दिनों तक पूछताछ भी की थी.  

2008 का शिकोहपुर भूमि सौदा 

यह पूरा मामला फरवरी 2008 में हुए एक भूमि लेन-देन के इर्द-गिर्द घूमता है. स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी, जिसमें रॉबर्ट वाड्रा पहले निदेशक थे, ने शिकोहपुर में 3.5 एकड़ का प्लॉट ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से साढ़े सात करोड़ रुपये में खरीदा था. उस समय हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा थे. सिर्फ चार साल बाद सितंबर 2012 में यही जमीन रियल्टी दिग्गज डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दी गई. इतने कम समय में जमीन की कीमत में सात गुना से अधिक का उछाल देखते ही बनता है.  

आईएएस अशोक खेमका ने उठाया था मामला

अक्टूबर 2012 में तत्कालीन आईएएस अधिकारी अशोक खेमका, जो उस समय भूमि संरक्षण एवं भू-अभिलेख महानिदेशक थे, ने इस लेन-देन में गड़बड़ी पकड़ी. उन्होंने राज्य संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन और प्रक्रियात्मक चूक का हवाला देते हुए इस सौदे के आधार पर हुए दस्तावेजों को रद्द कर दिया. उस समय यह मामला सियासी गलियारों में गरमा गया था. खेमका को बाद में तबादले का सामना भी करना पड़ा था. 

वाड्रा ने ठुकराए आरोप, बोले- राजनीतिक प्रतिशोध

रॉबर्ट वाड्रा ने हमेशा से ही इन सभी आरोपों से इनकार किया है. उनका कहना है कि यह सब उनके और उनके परिवार के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध है. उनके परिवार में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शामिल हैं. वाड्रा का आरोप है कि भले ही कोई वास्तविक अपराध न हो, लेकिन उनके परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि इसी मामले में 43 अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया है, जिनकी अनुमानित कीमत 37.64 करोड़ रुपये है. ये संपत्तियां वाड्रा और उनसे जुड़ी कंपनियों से जुड़ी बताई जाती हैं.