दिल्ली में CJP के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद राजधानी में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हैं. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच केवल हिंसा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके पीछे की साजिश, सोशल मीडिया गतिविधियों और संदिग्ध विदेशी कनेक्शन की भी पड़ताल की जाएगी.
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद जांच को कई स्तरों पर आगे बढ़ाया है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब तक 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. वहीं कुछ रिपोर्टों में यह संख्या 100 से ज्यादा बताई गई है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि हिरासत में लिए गए सभी लोग छात्र नहीं हैं. इसलिए पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि प्रदर्शन में शामिल अन्य लोगों की भूमिका क्या थी और क्या हिंसा पहले से तय योजना का हिस्सा थी. अलग-अलग शिकायतों के आधार पर कई एफआईआर दर्ज की गई हैं और हर मामले की अलग से जांच की जा रही है.
जांच एजेंसियों की नजर अब सोशल मीडिया पर भी है. पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कई ऐसे पोस्ट वायरल किए गए जिनमें मौत, बड़ी संख्या में घायलों और गिरफ्तारी को लेकर अलग-अलग दावे किए गए. पुलिस इन दावों की सच्चाई की जांच कर रही है. साथ ही कुछ ऐसे सोशल मीडिया हैंडल भी जांच के दायरे में हैं, जिनके बारे में शक है कि वे पाकिस्तान से संचालित हो सकते हैं. अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी संगठन, समूह या किसी अन्य पक्ष की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. लोगों से अपील की गई है कि बिना पुष्टि वाली खबरों को साझा न करें.
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों पर लगातार पथराव किया गया. इस हिंसा में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 50 से अधिक जवान घायल हुए हैं. इनमें पांच से ज्यादा आईपीएस अधिकारी भी शामिल बताए गए हैं. पुलिस की दो बसों को भी नुकसान पहुंचा और जनपथ इलाके में कुछ दुकानों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं. पुलिस का कहना है कि पूरे मामले के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है. संसद मार्ग, जंतर-मंतर और नई दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. अधिकारियों ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.