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CBSE Board Exam 2026: 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए सख्त नियम, उल्लघंन करने पर नहीं दे पाएंगे एग्जाम

सीबीएसई ने कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में बैठने के लिए नए नियम जारी किए हैं. अब छात्रों को कम से कम 75% उपस्थिति, दो साल की लगातार पढ़ाई और आंतरिक मूल्यांकन में भागीदारी अनिवार्य होगी.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
CBSE Board Exam 2026: 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए सख्त नियम, उल्लघंन करने पर नहीं दे पाएंगे एग्जाम
Courtesy: social media

CBSE Board Exam 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बोर्ड परीक्षाओं की गंभीरता और अनुशासन को सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं. नए निर्देशों के तहत अब केवल परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन ही काफी नहीं होगा, बल्कि छात्रों को दो साल तक नियमित उपस्थिति और आंतरिक मूल्यांकन में भागीदारी भी अनिवार्य रूप से करनी होगी. यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किए गए हैं.

सीबीएसई ने स्पष्ट कर दिया है कि कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं दो वर्षीय कार्यक्रम होंगी. यानी कक्षा 9वीं और 10वीं मिलकर 10वीं बोर्ड परीक्षा का आधार बनेंगी, जबकि 11वीं और 12वीं मिलकर 12वीं बोर्ड की तैयारी का हिस्सा होंगी. कोई भी छात्र अगर बीच से दाखिला लेकर सीधे परीक्षा देने की कोशिश करता है, तो उसे अनुमति नहीं दी जाएगी. सभी विषयों का अध्ययन दो साल तक लगातार करना अनिवार्य होगा.

उपस्थिति होगी सबसे बड़ा आधार

नए नियमों के मुताबिक, बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए कम से कम 75% उपस्थिति जरूरी है. स्कूलों को रोजाना उपस्थिति का रिकॉर्ड रखना होगा. हालांकि, मेडिकल इमरजेंसी, किसी प्रियजन की मृत्यु या राष्ट्रीय स्तर के खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भागीदारी जैसी विशेष परिस्थितियों में 25% तक की छूट दी जा सकती है, वह भी वैध दस्तावेजों के आधार पर. लेकिन बिना ठोस वजह के अनुपस्थित रहने वाले छात्र अब सीधे अयोग्य माने जाएंगे.

आंतरिक मूल्यांकन में भागीदारी अनिवार्य

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत अब आंतरिक मूल्यांकन वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य बना दिया गया है. इसमें प्रोजेक्ट, कक्षा गतिविधियां, टेस्ट और व्यवहारिक सहभागिता शामिल हैं. यदि छात्र नियमित रूप से स्कूल नहीं आते, तो वे स्वचालित रूप से इन मूल्यांकनों से वंचित रहेंगे. ऐसी स्थिति में बोर्ड उनके परिणाम घोषित नहीं करेगा और उन्हें 'एसेंशियल रिपीट' श्रेणी में डाल दिया जाएगा, चाहे उन्होंने थ्योरी परीक्षा दी हो या नहीं.

अतिरिक्त विषय और निजी उम्मीदवारों पर नियम

सीबीएसई ने अतिरिक्त विषयों पर भी पाबंदियां तय की हैं. 10वीं के छात्र केवल दो अतिरिक्त विषय चुन सकते हैं, जबकि 12वीं में सिर्फ एक अतिरिक्त विषय की अनुमति है. ये विषय भी दो वर्षों तक पढ़ना अनिवार्य है. बिना योग्य शिक्षक और प्रयोगशाला वाले स्कूलों को ऐसे विषय ऑफर करने की अनुमति नहीं होगी.

वहीं, जो छात्र कंपार्टमेंट या 'एसेंशियल रिपीट' में आए हैं, वे निजी उम्मीदवार के रूप में दोबारा परीक्षा दे सकते हैं, लेकिन जिन छात्रों ने दो साल का नियमित अध्ययन और उपस्थिति पूरी नहीं की, वे निजी उम्मीदवार के तौर पर भी अतिरिक्त विषय नहीं चुन सकेंगे.