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'6 महीने में भारत का हिस्सा होगा PoK...', क्या इतनी आसानी से मिल जाएगा पूरा कश्मीर?

जम्मू और कश्मीर का कुछ हिस्सा, पाकिस्तान के कब्जे में है. साल 1947 के बाद से अब तक, इस हिस्से को वापस लेने की कवायद तो होती है, दावे किए जाते हैं लेकिन किसी भी सरकार ने इस पर आगे बढ़ने की कोशिश नहीं की. गृहमंत्री सार्वजनिक मंचों से कई बार कह चुके हैं कि PoK हमारा है, हम इसे वापस लेंगे. लेकिन क्या ये इतना आसान है, आइए समझते हैं.

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PoK
Courtesy: Social Media

लोकसभा चुनाव 2024 की चुनावी रैलियों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं कहा था अगर सरकार बनती है तो 6 महीने के भीतर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) हमारा होगा. नेता भी कोई ऐसा-वैसा नहीं, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जिन्हें उनके समर्थक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी के तौर पर देखते हैं. सिर्फ वे नहीं, देश के लोकप्रिय नेता और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कह चुके हैं कि पीओके को हमें लेने की जरूरत नहीं है, वहां की जनता ही सरेंडर कर देगी कि उसे भारत में मिलना है. गृहमंत्री अमित शाह भी कह चुके हैं पीओके हमारा हिस्सा है, हम इसे वापस लेंगे. 

योगी आदित्यनाथ ने एक जनसभा में कहा था, 'कोई हमारे लोगों को मारेगा तो हम उसको पूजेंगे नहीं. अब तो PoK को बचाना मुश्किल हो रहा है, आप देखना चुनाव बाद पीएम मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के अगले 6 महीने के अंदर, पाक अधिकृत कश्मीर भी भारत का हिस्सा होगा.'

नरेंद्र मोदी, तीसरी बार भी प्रधानमंत्री बन गए हैं. रक्षा से लेकर गृह मंत्रालय तक, उन्हीं के पास हैं. सारे अहम मंत्रालय उनके पास हैं. उनके पास फौज भी वही है, जिसने साल 2019 में कश्मीर से अनुच्छेद 370 का निरसन किया था, ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत, अपनी खोई हुई जमीन वापस ले पाएगा. आइए जानते हैं यह करना कितना कठिन है.

कैसे भारत ने गंवाया था कश्मीर, क्या थी ऐतिहासिक गलती?

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर हमारा हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान का कब्जा है.  साल 1947 में जब भारत को आजादी मिली, तब कश्मीर को भारत या पाकिस्तान, किसी में शामिल होने के लिए स्वतंत्र रूप से छोड़ दिया गया. कश्मीर के राजा हरि सिंह, यह निर्णय नहीं कर पा रहे थे उन्हें किसने साथ जाना है. पाकिस्तान, कश्मीर की बहुसंख्यक आबादी मुस्लिम होने की वजह से यह समझता था कि उस पर उसी का हक है. 

पाकिस्तान के पश्तूनी लड़ाकों ने भारत पर हमला बोल दिया था. हरि सिंह ने भारत को चिट्ठी लिखी कि उन्हें मदद की जरूरत है. तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कहा अगर आप विलय करेंगे, तभी हमारी सेना पाकिस्तानियों को खदेड़ेगी. हरि सिंह ने इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर हस्तारक्षर भी किया. भारतीय सेना कश्मीर में घुसी और पाकिस्तानी घुसपैठियों को को खदेड़ दिया. 

क्या इतना आसान है PoK हासिल कर पाना?

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की सेना सीमा पूर्व और उत्तर में कश्मीर, उत्तर-पश्चिम में उत्तरी क्षेत्र और पश्चिम में गिलगित-बाल्टिस्तान से लगती है. इसका क्षेत्रफल लगभग 906,000 वर्ग किमी है. इसकी राजधानी मुजफ्फराबाद है. साल 1948 में जवाहर लाल नेहरू, संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे को लेकर पहुंच गए. संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पारित हुआ कि जिसका जहां कब्जा है, वो वहीं रहे, उससे आगे न बढ़े. संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि कश्मीर पर जनमत संग्रह होना चाहिए. भारत ने कहा कि पाकिस्तान को भारत की जमीन से हटना हो होगा. भारत ने कहा कि पहले पश्तूनियों को कश्मीर से हटाओ, फिर ऐसा हो सकता है.  

यह मुद्दा अभी संयुक्त राष्ट्र में है, जिस पर फैसला कोई भी आए, भारत मानने वाला नहीं है. भारत के पास दो रास्ते हैं. पाकिस्तान में अगर गृह युद्ध की स्थिति पैदा हो और उनका ध्यान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से हटकर अपने देश पर लग जाए और वहां के लोग खुद ही भारत में शामिल होने के लिए आवाज उठाने लगें. दूसरा तरीका यह है कि अगर पाकिस्तान, कभी भारत पर हमला बोले तो जवाबी कार्रवाई में भारत अपनी सीमा से बढ़कर हमला करे और घुसपैठ वाली जगहों पर कब्जा जमा ले. यह मामला संयुक्त राष्ट्र में है अब. सहज स्थिति में इसे लेना आसान नहीं है. भारत की पहले आक्रमण की नीति नहीं रही है, ऐसे में सीधे तौर पर 6 महीने में ही हासिल करना आसान नहीं है. सरकार को PoK हासिल करने में दशकों लग सकते हैं, वह भी तब, जब रणनीतियों के नतीजे देश के हिसाब से ही निकलें.

क्यों Pok की वापसी, भारत के लिए है जरूरी?

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, भारत की सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद अहम है. चीन और पाकिस्तान मिलकर अभी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के संसाधनों का दोहन कर रहे हैं. पाकिस्तान चाहता है कि चीन-पाकिस्तान कॉरिडोर के रास्ते उसकी पकड़ एशिया तक हो सके. भारत के लिए इसे रोकना हर लिहाज से जरूरी है. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से सीमा साझा करता है. वहां खनि पदार्थों की भरमार है. 

चीन की राह, भारत के लिए बड़ा खतरा है. पीओके की भौगोलिक संरचना ऐसी है, जिसकी वजह से भारत में घुसपैठ करने में आतंकियों को आसानी होती है. अगर पीओके भारत वापस लेता है तो पाकिस्तान से होने वाली घुसपैठों पर रोक लग जाएगी. जिस जन्नत जैसी जगह को पाकिस्तान, आतंकी ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल करता है, अगर भारत जमीन वापस लेता है तो यह धंधा बंद हो जाएगा. पाकिस्तान का भारत और मजबूत और प्रभावी तरीके से जवाब देने की स्थिति में आ जाता.