प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 1,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दे दी है. इस योजना के तहत द्वितीयक स्रोतों से दुर्लभ खनिजों के पृथक्करण और उत्पादन के लिए देश में रीसाइकिलिंग क्षमता विकसित की जाएगी.
चीन द्वारा रेयर अर्थ्स पर निर्यात प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत ने अपनी सप्लाई चेन सुरक्षित करने और आयात निर्भरता घटाने के लिए यह अहम कदम उठाया है.
भारत ने वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला में बढ़ती चुनौतियों के बीच एक बड़ा फैसला लिया है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 1,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को हरी झंडी दी गई. इस योजना का उद्देश्य घरेलू स्तर पर रीसाइकिलिंग और उत्पादन को बढ़ावा देना है, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आज द्वितीयक स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिजों के पृथक्करण और उत्पादन के लिए देश में पुनर्चक्रण क्षमता विकसित करने हेतु 1,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी। pic.twitter.com/W2AjuBMEXK
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 3, 2025
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई यह योजना नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम, टर्बियम और समेरियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की रीसाइकिलिंग को प्रोत्साहित करेगी. इन खनिजों का इस्तेमाल हाई-परफॉर्मेंस मैग्नेट्स में होता है, जो ईवी, क्लीन-टेक और रक्षा उद्योग के लिए बेहद जरूरी हैं. योजना का मकसद न केवल घरेलू रीसाइकिलिंग नेटवर्क विकसित करना है, बल्कि चीन पर बढ़ती निर्भरता को कम करना भी है. सरकार का मानना है कि इससे आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक खनिज आपूर्ति में मजबूत भूमिका निभा सकेगा.