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India Daily

'...तब बड़ी मछली छोटी मछली को खाने लगती है', पीएम मोदी का दुनिया को संदेश

पीएम ने चाणक्य के अर्थशास्त्र का जिक्र करते हुए कहा कि जब व्यवस्था कमजोर पड़ती है तो मत्स्य न्याय पैदा होता है और दुनिया को ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जो मत्स्य न्याय को रोके.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'...तब बड़ी मछली छोटी मछली को खाने लगती है', पीएम मोदी का दुनिया को संदेश
Courtesy: X

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने वैश्विक दौड़ में भारत की भूमिका का जिक्र किया. पीएम ने कहा कि वैश्विक क्रम यानी वर्ल्ड ऑर्डर बदल रहा है तो फिर व्यवस्था भी उसी के अनुसार बदलनी चाहिए. यूएन में सुधार की बात दोहराते हुए पीएम ने कहा कि यदि व्यवस्था नहीं रही तो फिर मत्स्य न्याय होने लगता है. बड़ी मछली छोटी मछली को खाने लगती है. पीएम ने चाणक्य के अर्थशास्त्र का जिक्र करते हुए कहा कि जब व्यवस्था कमजोर पड़ती है तो मत्स्य न्याय पैदा होता है और दुनिया को ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जो मत्स्य न्याय को रोके.

 

पीएम ने कहा आप सभी ने भारत की फार्मास्यूटिकल क्षमताओं के बारे में सुना होगा. कुछ साल पहले तक भारत दवा और कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर था लेकिन अब भारत इस स्थिति को बदल रहा है.

भारत टॉप-3 इकोनॉमी बनने की ओर अग्रसर

पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज टॉप-3 इकोनॉमी बनने के लिए पूरी शक्ति के साथ काम कर रहा है और हमारा हौसला तब और बढ़ता है जब हम वर्तमान समय में दुनिया के सामने आ रही चुनौतियों को देखते हैं और इसमें भी भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था के तौर पर उभरता है.

कांग्रेस पर साधा निशाना

इकोनॉमिक मंच पर भी प्रधानमंत्री विपक्ष को निशाना बनाने से नहीं चूके. उन्होंने कहा कि आखिर कब तक कांग्रेस अपने फेल्ड प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश को दांव पर लगाती रहेगी. ऐसा कहकर उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सालभर में हमारे श्रीहरिकोटा से इतनी लॉन्चिंग नहीं होती जितनी एक साल में कांग्रेस के लोग अपने नेता को लॉन्च करने की विफल कोशिश कर लेते हैं.