मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की विपक्ष की मांग पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि प्रस्ताव आने पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा. उन्होंने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया जैसी है.
विपक्ष ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए फिर से प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. इससे पहले 12 मार्च को संसद के दोनों सदनों में इस संबंध में नोटिस दिया गया था. इस पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों के हस्ताक्षर थे. हालांकि, नोटिस खारिज कर दिया गया था. विपक्ष ने आरोप लगाया था कि नोटिस खारिज करने की वजह नहीं बताई गई.
ओम बिरला ने कहा कि परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने का फैसला सरकार को करना है. उन्होंने यह भी कहा कि पहले ऐसे मौके आए हैं, जब संसद का सत्र लंबे समय तक समाप्त नहीं किया गया.
संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन अभी तक सत्रावसान नहीं हुआ है. लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, तकनीकी रूप से सत्र अब भी जारी है. इसलिए सदन की बैठक दोबारा बुलाने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी.
सूत्रों के मुताबिक, सदन की बैठक दोबारा बुलाने के लिए पहले से नोटिस देना अनिवार्य नहीं है. हालांकि, सांसदों को अपनी योजना बनाने और संसद पहुंचने की सुविधा देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष तीन से सात दिन पहले सूचना दे सकते हैं. दोबारा बैठक होने पर इसे विशेष सत्र या पिछले सत्र की निरंतरता कहा जा सकता है.
लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि शीतकालीन सत्र बुलाने के लिए 14 दिन का नोटिस देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य नहीं है. आमतौर पर सांसदों को प्रश्नकाल के लिए नोटिस देने का पर्याप्त समय देने के लिए ऐसा किया जाता है. विशेष सत्र के तुरंत बाद शीतकालीन सत्र बुलाने पर भी रोक नहीं है. संवैधानिक प्रावधान के अनुसार, संसद के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर बताया है कि सरकार डीएमके, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) और बीजू जनता दल के संपर्क में है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर सकती है. दो-तिहाई बहुमत को लेकर आश्वस्त होने के बाद फैसला लिया जा सकता है. इस दौरान 26 और 27 अक्टूबर को होने वाले ब्रिक्स संसदीय फोरम को भी ध्यान में रखा जाएगा.