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Anti-Paper Leak Bill Explained: नया एंटी-पेपर लीक बिल क्या है? जानिए पुराने कानून से कैसे है अलग

केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए लोकसभा में एंटी-पेपर लीक (संशोधन) विधेयक पेश किया है. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों का भरोसा मजबूत करना है.

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Edited By: Reepu Kumari
Anti-Paper Leak Bill Explained: नया एंटी-पेपर लीक बिल क्या है? जानिए पुराने कानून से कैसे है अलग
Courtesy: Grok

नई दिल्ली: देशभर में पेपर लीक के आरोपों और छात्रों के विरोध के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सख्त और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सोमवार को लोकसभा में एंटी-पेपर लीक (संशोधन) विधेयक पेश किया गया, जिसका उद्देश्य परीक्षा से जुड़े अपराधों पर तेजी से कार्रवाई और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना है. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह विधेयक लोकसभा में पेश किया. सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन मौजूदा कानून को और प्रभावी बनाएगा. इसमें जांच की समय-सीमा तय करने, विशेष अदालतों के गठन और दोषियों के लिए कड़ी सजा जैसे कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं.

2024 के कानून से कैसे अलग है नया प्रस्ताव

प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक के मामलों में सजा को और कड़ा बनाने का प्रस्ताव है. जहां 2024 के कानून में तीन से पांच साल तक की कैद का प्रावधान था, वहीं नए विधेयक में इसे बढ़ाकर 10 साल तक करने का प्रस्ताव रखा गया है. जुर्माने की अधिकतम सीमा भी 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है.

जांच और अदालत की प्रक्रिया होगी समयबद्ध

नए विधेयक में हर राज्य में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रस्ताव रखा गया है. इन अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी और 90 दिनों के भीतर फैसला देने का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही जांच दो महीने में पूरी करने का प्रावधान भी प्रस्तावित है, ताकि मामलों का जल्द निपटारा हो सके.

एसटीएफ और हाईकोर्ट में अपील का नया प्रावधान

प्रस्तावित कानून के तहत पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की जांच के लिए एक समर्पित स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का प्रस्ताव है. इसके अलावा हाईकोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील 30 दिनों के भीतर दाखिल करनी होगी. विधेयक में यह भी प्रस्तावित है कि हाईकोर्ट तीन महीने के भीतर अपील पर फैसला सुनाए.

सरकार ने सुधारों की दिशा में उठाए कई कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के दिनों में वीडियो संदेशों के जरिए छात्रों से संवाद करते हुए पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून लाने की जानकारी दी थी. उन्होंने बाद में छह सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषणा की, जिसकी अध्यक्षता नंदन नीलेकणी करेंगे. समिति परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और तकनीक आधारित सुधारों पर सुझाव देगी.

शिक्षा मंत्रालय और एनटीए में भी कार्रवाई

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया. इसके बाद प्रधानमंत्री ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी. सरकार ने परीक्षा अनियमितताओं पर कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त किया है. इसके अलावा एनटीए की कार्यप्रणाली में सुधार और परीक्षा सुरक्षा मजबूत करने के लिए भी कई बदलावों की तैयारी की जा रही है. वहीं, दिल्ली पुलिस ने यूपीएससी और एनटीए सहित प्रमुख परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक विशेष कार्यबल का गठन किया है.