प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2022 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश को 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने का महासंकल्प दिया था. वर्तमान में आजादी के 100 साल पूरे होने में 21 वर्ष का समय शेष है. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में केवल 37 देश ही विकसित श्रेणी में आते हैं, जिनमें एशिया से सिर्फ जापान और साउथ कोरिया शामिल हैं. भारत के लिए इस विशेष क्लब में जगह बनाना एक ऐतिहासिक आर्थिक बदलाव की मांग करता है.
वर्ल्ड बैंक देशों की आर्थिक स्थिति को प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) के आधार पर चार श्रेणियों में बांटता है. भारत वर्तमान में 'लोअर मिडिल इनकम' (Lower Middle Income) वर्ग में आता है, जहां प्रति व्यक्ति सालाना आय $2,760 (लगभग ₹2.63 लाख) है. इसका अर्थ यह है कि एक औसत भारतीय महीने में केवल 21 से 22 हजार रुपये ही कमा पाता है. भारत की अर्थव्यवस्था का आकार बड़ा होने के बावजूद विशाल आबादी के कारण प्रति व्यक्ति आय का यह स्तर विकसित देशों से काफी पीछे है.
The @WorldBankGroup has released its 2026-2027 Country Income Classifications.
— World Bank Group (@WorldBankGroup) July 7, 2026
Six economies moved to a higher income category, and no countries moved down.
Behind those changes are different stories, from economic recovery to export-led growth and improved statistics.
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वर्ल्ड बैंक के मानकों के अनुसार, 'हाई इनकम' यानी विकसित देशों की श्रेणी में आने के लिए प्रति व्यक्ति आय $14,375 (लगभग ₹13.70 लाख) से अधिक होनी चाहिए. भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अपनी मौजूदा जीडीपी को 4 ट्रिलियन डॉलर से बढ़ाकर 20 ट्रिलियन डॉलर से अधिक करना होगा, यानी अर्थव्यवस्था का आकार सीधे 5 गुना बढ़ाना होगा.
Updated IMF Growth Forecasts for 2026:
— IMF (@IMFNews) July 8, 2026
🇺🇸 US: 2.3%
🇩🇪 Germany: 0.7%
🇫🇷 France: 0.6%
🇬🇧 UK: 1.0%
🇨🇳 China: 4.6%
🇯🇵 Japan: 0.6%
🇮🇳 India: 6.4%
🇷🇺 Russia: 1.1%
🇧🇷 Brazil: 2.4%
🇸🇦 Saudi Arabia: 1.7%
🇳🇬 Nigeria: 4.1%
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इसके साथ ही, भारत को अगले दो दशकों तक लगातार 8% की वार्षिक आर्थिक विकास दर (GDP Growth Rate) बनाए रखनी होगी, जो कि एक बड़ी चुनौती है.