आजकल बच्चों की सेहत को लेकर नई चिंता सामने आ रही है. फैटी लिवर अब सिर्फ बड़े लोगों की समस्या नहीं रही. छोटे बच्चे भी जंक फूड और बैठे रहने की आदत के कारण इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. लिवर शरीर का महत्वपूर्ण अंग है जो भोजन पचाने और विषाक्त पदार्थ निकालने का काम करता है. विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता अगर थोड़ी सावधानी बरतें तो बच्चों को इस खतरे से बचाया जा सकता है.
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अमिताभ दत्ता बताते हैं कि भारत में लगभग हर तीन बच्चों में से एक को फैटी लिवर हो सकता है. यह समस्या पहले सिर्फ वयस्कों में देखी जाती थी, लेकिन अब बच्चे भी शिकार बन रहे हैं. बच्चा बाहरी तौर पर स्वस्थ दिख सकता है, फिर भी उसके लिवर में फैट जमा होता रहता है. भारत में यह समस्या दुनिया के मुकाबले चार गुना ज्यादा है.
डॉ. दत्ता कहते हैं कि अब यह बीमारी सिर्फ मोटे बच्चों तक सीमित नहीं है. सामान्य वजन वाले बच्चों में भी फैटी लिवर देखा जा रहा है. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा चीनी और कम व्यायाम मुख्य कारण हैं. बच्चे ज्यादा समय स्क्रीन के सामने बिताते हैं जिससे उनका शरीर सक्रिय नहीं रह पाता. लिवर कमजोर पड़ रहा है.
इस समस्या से बचाने के लिए माता-पिता को डाइट पर ध्यान देना चाहिए. जंक फूड और मीठी ड्रिंक्स कम करें. घर का साबुत अनाज, फल और सब्जियां दें. रोजाना 30 मिनट खेलने या वॉक करवाएं. शुरुआती चरण में बदलाव से बीमारी को रोका जा सकता है.
लिवर स्वस्थ रखने के लिए संतुलित भोजन लें जिसमें साबुत अनाज और अच्छी प्रोटीन हो. नियमित व्यायाम करें. अगर मोटापा या डायबिटीज हो तो लिवर फंक्शन टेस्ट और फाइब्रोस्कैन करवाएं. समय पर जांच जरूरी है. फैटी लिवर शुरू में कोई लक्षण नहीं दिखाता. इसलिए माता-पिता बच्चों की दिनचर्या पर नजर रखें. सही आदतें डालकर हम बच्चों को इस समस्या से बचा सकते हैं.