अभिनेत्री और भाजपा नेता कंगना रानौत ने हाल ही में इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक पोस्ट शेयर कर स्वास्थ्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है. उन्होंने 50 साल से कम उम्र के लोगों में कैंसर की दर दिखाते हुए नक्शा शेयर किया और लिखा कि भारतीयों को अपनी पारंपरिक डाइट पर भरोसा रखना चाहिए.
कंगना ने लिखा- 'प्रिय भारतीयों, हमारी डाइट सबसे अच्छी है. हमें किसी के प्रभाव में आने की जरूरत नहीं. होल फूड्स खाएं, प्रोटीन शेक या जंक फूड जैसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स कम करें. हां, ज्यादा प्रोटीन दिमाग को बेवकूफ बना देता है. साफ और हल्का खाएं, और याद रखें कि मूवमेंट दवा है.' कंगना का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. कई लोग इसे पसंद कर रहे हैं तो कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे गलत बताया है.
पुणे की COA बायोहैकिंग क्लिनिक की क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट रिया ओसवाल कहती हैं कि यह दावा बहुत सरल तरीके से जटिल मुद्दे को पेश करता है. 'वैज्ञानिक रूप से कोई सबूत नहीं है कि ज्यादा प्रोटीन खाने से इंसान 'दिमागी रूप से कमजोर' हो जाता है. बल्कि प्रोटीन शरीर को जरूरी अमीनो एसिड देता है, जो न्यूरोट्रांसमीटर बनाने में मदद करता है. ये न्यूरोट्रांसमीटर मेमोरी, एकाग्रता और ब्रेन हेल्थ के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं.'
कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अस्मा पठान भी कहती हैं, 'प्रोटीन से इंटेलिजेंस या ब्रेन फंक्शन पर बुरा असर पड़ने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. हां, किसी भी चीज का अत्यधिक सेवन ठीक नहीं होता. अगर कोई व्यक्ति इतना ज्यादा प्रोटीन खाए कि फल, सब्जियां, अनाज और दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थ छोड़ दे तो डाइट असंतुलित हो सकती है. लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि प्रोटीन दिमाग को नुकसान पहुंचाता है.'
विशेषज्ञों के अनुसार प्रोटीन मांसपेशियों, हड्डियों, इम्यूनिटी और ब्रेन के लिए आवश्यक है. अंडा, दाल, दूध, पनीर, मछली, चिकन, सोयाबीन और नट्स जैसे प्राकृतिक स्रोतों से प्रोटीन लेना अच्छा माना जाता है. प्रोटीन शेक का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से करना चाहिए, न कि बिना सलाह के.
कंगना रानौत का सुझाव कि भारतीय अपनी पारंपरिक थाली (रोटी, सब्जी, दाल, दही, चावल आदि) पर भरोसा रखें, कई डॉक्टरों को सही लगता है. लेकिन 'ज्यादा प्रोटीन दिमाग कमजोर करता है' वाली बात को वे गलत बता रहे हैं.